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प्रदूषण और अपराध के कहर से दिल्ली छोड़ने को मजबूर हैं लोग

हाईकोर्ट का कहना है कि, "लोग प्रदूषण और अपराध का ग्राफ बढ़ने की वजह से दिल्ली छोड़कर जा रहे हैं।"

प्रदूषण और अपराध के कहर से दिल्ली छोड़ने को मजबूर हैं लोग

नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली में प्रदूषण और क्राइम बढ़ने से लोग अब शहर छोड़ने पर मजबूर हो रहे हैं। बुधवार को हाईकोर्ट ने कहा कि प्रदेश-सरकार और पुलिस अपराध के बढ़ते मामलों पर लगाम लगाने में नाकाम साबित हो रही है। इसलिए लोग दिल्ली छोड़कर जा रहे हैं।

हफिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र द्वारा कोर्ट को यह बताए जाने पर कि जनगणना रिकॉर्ड के अनुसार दिल्ली की जनसंख्या की दशकीय वृद्धि दर में गिरावट आ रही है, तो बदर दुरेज अहमद और आशुतोष कुमार की एक बेंच ने इस मामले की गंभीरता से जांच की।

देश की राजधानी में जनसंख्या वृद्धि में आई गिरावट के हवाले से अदालत ने कहा कि, "लोग प्रदूषण और अपराध का ग्राफ बढ़ने की वजह से दिल्ली छोड़कर जा रहे हैं। जिसे अधिकारी नियंत्रित करने के लिए तैयार नहीं हैं।"

बता दें कि 16 दिसंबर, 2012 के निर्भया गैंगरेप मामले के बाद से दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान यह बात कही गई है। इस याचिका में बढ़ते अपराधों की जांच और दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा में सुधार लाने के संबंध में समय-समय पर निर्देश दिए गए हैं।

अदालत ने यह भी कहा कि दिल्ली पुलिस फोरेंसिक लैब को प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन लाने की कोशिश कर रही है जबकि आप सरकार ने इसे बंद करने को कहा है। हालांकि कोर्ट ने दिल्ली सरकार या वकीलों को इस मामले में जांच करने के कोई दिशा-निर्देश नहीं दिए हैं।

गौरतलब है कि न्यायमित्र मीरा भाटिया ने अदालत को बताया कि इस साल जनवरी से आठ अगस्त तक दिल्ली में बलात्कार की कई घटनाएं हुई हैं। जिसपर अदालत ने तीखी टिप्पणी की और कहा कि, "शहर में आखिर हो क्या रहा है ?"

वही दूसरी तरफ केंद्र का कहना है कि, " इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय समिति (एचएलसी) का गठन किया गया है और 27 जुलाई को आयोजित एक बैठक में दिल्ली पुलिस की ताकत बढ़ाने के लिए कुछ निर्णय भी लिए गए थे। दिल्ली पुलिस के वकील राजेश महाजन ने अदालत को बताया कि बैठक में जारी हुए विभिन्न प्रस्तावों के दो पत्र एलजी सहित 54,000 कर्मचारियों को भेज दिए गए हैं।

अदालत ने वकील से कहा कि लेफ्टिनेंट गवर्नर द्वारा यह प्रस्ताव जल्द से जल्द से केंद्र को भेज दिए जाएं। अगली सुनवाई फिलहाल 14 सितंबर को होनी हैं।

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