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आइआइटी में पढ़ेंगे पाकिस्तानी छात्र!

एचआरडी के प्रस्ताव को विदेश और गृह मंत्रालय की मंजूरी

आइआइटी में पढ़ेंगे पाकिस्तानी छात्र!

नई दिल्ली. दुनियाभर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए विख्यात भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) में जल्द ही पाकिस्तानी छात्र भी आकर पढ़ाई कर सकेंगे। इसके लिए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने खाका तैयार कर विदेश और गृह मंत्रालय से मंजूरी ले ली है।

विदेश मंत्रालय ने एचआरडी के इस प्रस्ताव को स्वीकृति देते हुए कहा कि यह भारत की अपने पड़ोसी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाने की नीति का ही हिस्सा है। इस विषय पर दोनों मंत्रालयों के साथ कई दौर की बातचीत के बाद अंतिम फैसला लिया गया। इसमें पाकिस्तानी छात्रों को वीजा देने के मामले में गृह मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है। गौरतलब है कि पहले पाकिस्तानी छात्र आईआईटी में एमटैक करने के लिए आते थे, लेकिन अब उन्हें शुरुआत से मौका दिया जाएगा।

सार्क के आठ देशों के छात्र शामिल
मंत्रालय के सूत्रों ने हरिभूमि को बताया कि पाकिस्तान के अलावा यह संस्थान सार्क समूह में शामिल अन्य देशों के छात्रों को अपने यहां पढ़ने का मौका देंगे। इसकी पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी आईआईटी बॉम्बे उठाएगा। अगले शैक्षणिक सत्र 2017-18 से आईआईटी-जेईई के लिए आयोजित की जाने वाली प्रवेश परीक्षा में भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, अफगानिस्तान, र्शीलंका और मालदीव के छात्र बैठेंगे। प्रवेश परीक्षा का पैटर्न भारतीय और सार्क देशों के लिए एक जैसा होगा। आईआईटी-मेन की परीक्षा सीबीएसई और एडवांस की परीक्षा आईआईटी संस्थानों द्वारा आयोजित की जाएगी।

हर वर्ष दो हजार सीटें होंगी
बाहर से आने वाले इन छात्रों के लिए आईआईटी के स्नातक पाठय़क्रम यानि बीटेक के लिए एक हजार सीटें और परास्नातक यानि पीजी कोर्स के लिए 800 से 900 सीटें रखी जाएंगी। प्रत्येक संस्थान अपने यहां 10 फीसदी सीटें इन छात्रों के दाखिले के लिए रखेगा। बाहरी छात्रों से डॉलर में फीस ली जाएगी। लेकिन अभी फीस को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। मंत्रालय में इसे लेकर विचार-विर्मश चल रहा है।

समझने की धारणा बढ़ेगी
सार्क के स्तर पर परीक्षा आयोजित कराने के पीछे इन संस्थानों का मकसद संपूर्ण संसार को अपना देश समझने की धारणा (कॉस्मोपोलिटन) को बढ़ावा देना, आईआईटी के पूरे वातावरण में बदलाव करना, इन संस्थानों की वैश्विक रैकिंग में सुधार करना और तकनीक के स्तर पर भारत को महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में स्थापित करना है।

हर वर्ष दो हजार सीटें होंगी
दुनियाभर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए विख्यात भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) में जल्द ही पाकिस्तानी छात्र भी आकर पढ़ाई कर सकेंगे। इसके लिए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने खाका तैयार कर विदेश और गृह मंत्रालय से मंजूरी ले ली है।

पहले पढ़ते थे एनआरआई के बच्चे
आईआईटी संस्थानों में पहले भी विदेशी छात्र पढ़ते रहे हैं, लेकिन इसमें पश्चिम-एशिया के दुबई और सिंगापुर जैसे देशों में जाकर काम करने जाने वाले भारतीयों (एनआरआई) के बच्चे शामिल थे। उस देश के नागरिकों के बच्चों को यह संस्थान पढ़ने का मौका नहीं देते थे। एनआरआई के बच्चों के लिए भी आईआईटी संस्थान केवल जेईई-मेन की परीक्षा ही उनके देश में आयोजित करवाते थे। इसके बाद होने वाली जेईई-एडवांस की परीक्षा के लिए इन छात्रों को भारत आना ही पड़ता था। अब इसमें इथोपिया को भी शामिल किया गया है। पहले एनआरआई के 800 बच्चों को आईआईटी में पढ़ने का मौका मिलता था।

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