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ओडिशा: सरकारी अफसर का खुलासा, सार्वजनिक की ट्रांसजेंडर की पहचान

ईश्वर के आशीर्वाद से मैंने सभी बाधाओं पर जीत हासिल की है-रतिकांत प्रधान

ओडिशा: सरकारी अफसर का खुलासा, सार्वजनिक की ट्रांसजेंडर की पहचान
नई दिल्ली/केंद्रपाड़ा (ओड़िशा). रतिकांत प्रधान के रुप में पैदा हुई और ओड़िशा वित्तीय सेवा में नौकरी कर रही अधिकारी ने अब ऐश्वर्या रितुपर्णा प्रधान के रुप में नई पहचान आत्मसात की है। बंदरगाह शहर पारादीप में वाणिज्यिक कर अधिकारी (सीटीओ) के रुप में तैनात प्रधान को अपनी पहचान पर गर्व है।

लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर और भारतीय जनसंचार संस्थान से स्नातक प्रधान ने एक बैंक में क्लर्क की नौकरी का विकल्प चुनने से पहले एक अखबार में इंटर्नशिप की थी। बाद में उन्होंने राज्य सिविल सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त की । प्रधान ने कहा कि, 9 अप्रैल 2014 को सीटीओ के रुप में मेरी तैनाती हुई। उस समय मैं पुरुषों के कपड़े पहनती थी। कोर्ट के आदेश के बाद मैंने साड़ी पहननी शुरू कर दी।

पुरुष बनकर की नौकरी- प्रधान ने कहा कि ट्रांसजेंडरों को तीसरे लिंग की र्शेणी में मान्यता देने और उनके संवैधानिक अधिकारों की गारंटी देने के 15 अप्रैल 2014 के उच्चतम न्यायालय के फैसले की वजह से यह निर्णय लिया। ओड़िशा के कंधमाल जिले में जी उदयगिरि ब्लॉक के तहत गुमनाम कनाबागिरी गांव की निवासी प्रधान ने अक्टूबर 2010 में पुरुष उम्मीदवार के रुप में ओड़िशा वित्तीय सेवा में प्रवेश किया था। प्रधान ने याद किया कि, जिस दिन उच्चतम न्यायालय ने अपना ऐतिहासिक फैसला दिया, उसी दिन मैंने पुरुष लिंग की जगह तीसरे लिंग की पहचान चुनने का मन बना लिया था।

अधिकारी ने कहा कि, बदलाव ने बहुत से लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया। लेकिन सबकुछ सामान्य हो चुका है। बहुत से लोग जो मुझे पहले 'सर' कहते थे, अब 'मैडम' कह रहे हैं। मुझे विपरीत स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा क्योंकि मेरे वरिष्ठ अधिकारी का रुख काफी सहयोग भरा है। उन्होंने कहा कि उनकी ट्रांसजेंडर पहचान उन्हें मिली जिम्मेदारियों और दायित्व के रास्ते में कोई बाधा नहीं बनी है।

प्रधान ने कहा कि, कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष शपथपत्र में मैं पहले ही रितुपर्णा प्रधान बन चुकी हूं। मैंने अपना नाम और लिंग बदलने के लिए संबंधित रिकॉर्ड पहले ही जमा कर दिया है। उन्होंने कहा कि, मैंने अपने जीवन में परेशान करने वाले क्षण देखे हैं जैसा कि हमारे समुदाय के लोगों को रोजाना भुगतना पड़ता है। लेकिन ईश्वर के आशीर्वाद से मैंने सभी बाधाओं पर जीत हासिल की है।

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