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ऑड-इवन योजना से कितना घटा प्रदूषण, बताए सीपीसीबी : एनजीटी

सम-विषय योजना 30 अप्रैल को समाप्त होगी।

ऑड-इवन योजना से कितना घटा प्रदूषण, बताए सीपीसीबी : एनजीटी
नई दिल्ली. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने मंगलवार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) से राजधानी दिल्ली में ऑड-इवन योजना के दूसरे चरण के दौरान स्वतंत्र रूप से वायु गुणवत्ता की निगरानी और इसके आंकड़े एकत्रित करने को कहा है।
एनजीटी चेयरमैन स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने सीपीसीबी से इस एक पखवाड़े वाली ऑड-इवन योजना के पहले और बाद में वायु गुणवत्ता के आंकड़े संग्रहित करने और उसके विश्लेषण करने को कहा है। वैज्ञानिक महेन्द्र पाण्डेय की याचिका की संक्षिप्त सुनवाई के दौरान दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने हरित समिति को बताया कि वह स्वत: ही आंकड़ों का संग्रहण और स्वतंत्र रूप से इसका विश्लेषण कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि यह निगरानी सम-विषम योजना के परिप्रेक्ष्य में वायु गुणवत्ता की जांच के लिए की जा रही है। सम-विषय योजना 30 अप्रैल को समाप्त होगी। समिति ने वैज्ञानिक महेन्द्र पाण्डेय की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि संबंधित एजेंसियां ऑड-इवन योजना के दौरान स्वतंत्र रूप से वायु गुणवत्ता के स्तर की निगरानी कर रही हैं।
पाण्डेय पहले केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) से संबद्ध थे। उन्होंने वायु गुणवत्ता सूचकांक की स्वतंत्र निगरानी की मांग करते हुए कहा कि वाहनों से होने वाला उत्सर्जन राजधानी में वायु प्रदूषण का मुख्य कारक नहीं है।
हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
दिल्ली हाईकोर्ट ने ऑड-इवन रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर वाहनों की आवाजाही की अधिसूचना को रद्द करने की मांग वाली एक याचिका पर मंगलवार को आप सरकार से जवाब मांगा। प्रधान न्यायाधीश जी रोहिणी और न्यायमूर्ति जयंतनाथ की पीठ ने दिल्ली सरकार को नोटिस भी जारी किया और चल रही ऑड-इवन योजना से वकीलों के लिए छूट की मांग वाली एक और याचिका पर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।
अदालत का कहना था कि उसने अपने पहले के आदेश में दिल्ली सरकार से वकीलों के एक समूह द्वारा उनकी याचिका में उठाये गये मुद्दों पर विचार करने को कहा था जो सम-विषम योजना के पहले चरण में दाखिल की गयी थी।
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