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भारतीय जेलों में सुरक्षा बड़ी चुनौती, क्षमता से अधिक बंद हैं कैदी:

भारतीय जेलों में स्टॉफ के 34 फीसदी पद खाली हैं।

भारतीय जेलों में सुरक्षा बड़ी चुनौती, क्षमता से अधिक बंद हैं कैदी:
नई दिल्ली. भोपाल के केंद्रीय कारागार से हाल ही में सिमी आठ आतंकवादियों के भागने की घटना कोई नई नहीं है। इससे पहले देश की विभिन्न जेलों से सुरक्षा में सेंध लगाकर कैदियों के भागने की घटनाएं सामने आती रही हैं। भारतीय जेलों में सुरक्षा को चाकचौबंद रखने की चुनौती के पीछे जेलों में क्षमता से ज्यादा कैदियों की संख्या और सुरक्षाकर्मियों के खाली पदों पर भर्तियां न होना बड़ा कारण माना जा रहा है। केंद्र सरकार की ओर से जेलों के आधुनिकीकरण और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हर साल करोड़ो रुपये का बजट जारी होता है। मसलन राष्ट्रीय स्तर पर हर साल औसतन 20 प्रतिशत बजट बढ़ाया जा रहा है, लेकिन देश की सभी 1401 जेलों में बढ़ती कैदियों की संख्या के मुकाबले सुरक्षाकर्मियों की कमी जेलों की बदहाल हालत को जन्म देती आ रही है।
100 कैदियों की जगह औसतन 114 कैदी
नेशलन क्राइम रिकार्डस ब्यूरो यानि एनसीआरबी की एक रिपोर्ट पर नजर डाली जाए तो अदालतों में आपराधिक मामलों के लंबित होने के कारण देशभर की जेलों की बैरकों में क्षमता से ज्यादा कैदियों को रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2015 तक देश की जेलों में 3.66 लाख 781 कैदियों को रखने की क्षमता ही मौजूद हैं, लेकिन 4.19 लाख 623 कैदी जेलों में बंद रहे। मसलन 100 कैदियों की जगह औसतन 114 कैदी जेल की बैरकों में बंद पाये गये। इस आंकड़े के अनुसार देश के 15 राज्यों की जेलोें में आॅकपेंसी रेट 100 फीसदी से भी कम है। इससे पिछले साल यानि वर्ष 2014 की स्थिति देखी जाए तो इस दौरान भारत की जेलों में बंद कैदियों में जहां 1.34 लाख दोषी करार दिये गये कैदी बंद थे, तो वहीं 2.82 लाख यानि 67.2 प्रतिशत विचाराधीन कैदी भी बंद रहे, जिनकी रिहाई अदालतों में लंबित मामलों के कारण नहीं हो पा रही थी।
छत्तीसगढ़ में कैदियों की भरमार
एनसीआरबी के आंकड़ो के मुताबिक वर्ष 2015 तक भारत की विभिन्न जेलों में कैदियों की क्षमता से ज्यादा कैदियों की संख्या के लिहाज से देखा जाए तो छत्त्तीसगढ़ की जेलों में क्षमता से 233.9 प्रतिशत ज्यादा कैदी बंद रहे। जबकि दिल्ली की तिहाड़ समेत 10 जेलों 226.9 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश की जेलों में 168.8 प्रतिशत कैदी क्षमता से ज्यादा बंद पाए गये। एनसीआरबी की रिपोर्ट जारी होने तक देश की जेलों में 19 प्रतिशत कैदी मुस्लिम, दो तिहाई दलित और ओबीसी वर्ग से संबन्धित बताए गये हैं। इन कैदियों में अधिकांश अनपढ़ हैं। हालांकि सर्वाधिक 88,221 कैदी यूपी, 36,433 कैदी मध्य प्रदेश तथा 31,295 कैदी बिहार की जेलों में बंद पाए गये। जबकि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की जेलों में बंद कैदियों में से 63.8 प्रतिशत ऐसे हैं, जो या तो अनपढ़ हैं या फिर दसवीं कक्षा के बाद स्कूल छोड़ चुके हैं। यही नहीं दिल्ली की जेलों में बंद कुल कैदियों में से 42.5 प्रतिशत यानी 14,183 अपराधियों को उम्रकैद की सजा मिली है।
कैसे होगी जेलों में सुरक्षा
देश की जेलों में जिस प्रकार से कैदियों की संख्या क्षमता से कहीं अधिक बढ़ रही है, वहीं उसके विपरीत जेलों में विभागीय और सुरक्षाकर्मियों की अरसे से खाली पदो पर भर्तियां न होने के कारण भी जेलों की सुरक्षा व्यवस्था एक बड़ी चुनौती मानी जा सकती है। एनसीआरबी के ताजा आंकड़ो के मुताबिक देश की तमाम जेलों में वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर जूनियर स्तर के अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों के 34 प्रतिशत पद खाली पड़े हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार देशभर की जेलों में स्वीकृत 80,236 अधिकारियों व कर्मचारियों के पदों और 6906 वरिष्ठतम अधिकारियों को होना चाहिए, लेकिन वरिष्ठतम अधिकारियों के 2452 और अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों के 27,227 पद रिक्त पड़े हुए हैं।
झारखंड में सर्वाधिक पद खाली
रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली की जेलों में 47 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 28 प्रतिशत, पंजाब और राजस्थान में 41-41 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 33 प्रतिशत पद खाली हैं। जबकि सबसे ज्यादा 69 प्रतिशत झारखंड ओर 66 प्रतिशत बिहार की जेलों में ऐसे पद खाली पड़े हुए हैं।
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