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''खास'' को खास बनाती हैं ये एसिड अटैक पीड़ित महिलाएं

''खास'' में काम कर रही ये महिलाएं बहुत टैलेंटेड हैं

नई दिल्ली. दिल्ली में 'खास' नाम की एक ट्रैवल एजेंसी है, जिसका सिर्फ नाम ही खास नहीं है बल्कि वहां के लोग भी खास हैं। इस ट्रैवल एजेंसी में सिर्फ नेत्रहीन और एसिड अटैक पीड़ित महिलाएं ही काम करती हैं। आकाश भारद्वाज (32) नाम के एक शख्स ने इस ट्रैवल एजेंसी की शुरुआत की और सिर्फ नेत्रहीन और एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं को रोजगार देने का फैसला किया। आकाश की वजह से आज ये महिलाएं खुद को सशक्त महसूस करती हैं। .

आकाश बताते हैं कि पिछले साल दिवाली में मैं दिल्ली के लाजपत नगर में था। मैंने देखा कि एक महिला गुब्बारे बेच रही है। उसके चेहरे पर एसिड हमले के निशान थे। मैंने जब उससे पूछा कि क्या हुआ था तो उसने बताया कि पड़ोस में रहने वाले एक लड़के ने मेरे चेहरे पर एसिड फेंक दिया था। इस घटना के बाद मेरे पति ने मुझे छोड़ दिया। मेरे दो बच्चे हैं।

इनकी परवरिश के लिए मैं काम कर रही हूं। एसिड अटैक के पहले मैं एक मॉल में सिक्योरिटी इंचार्ज थी, लेकिन इस घटना के बाद मुझे कोई नौकरी देने को तैयार नहीं है। सब चेहरे के महत्व की बात करते हैं। आकाश कहते हैं कि उसने मुझे ये सारी बातें अंग्रेजी में बताई। इसके बाद मैंने ऐसे लोगों को रोजगार के एक अच्छा अवसर देकर मदद करने का फैसला किया। अभी हमारी ट्रैवल एजेंसी में 6 महिलाएं हैं, जो नेत्रहीन हैं।

हमारी एजेंसी इंडस्ट्रीयल टूर, फैमिली ट्रिप, एडवेंचर कैंप के अलावा कॉरपोरेट ऑर्गनाइजेशन, स्कूल और कॉलेज के लिए घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय टूर का आयोजन करती है। ये सभी काम नेत्रहीन कर्मचारियों द्वारा ही किया जाता है। आकाश कहते हैं कि जिन महिलाओं के साथ मैं काम कर रहा हूं वे सभी टैलेंटेड हैं।

द बेटर इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रैवल एजेंसी 'खास' में काम कर रही दीप्ति बताती हैं कि मैं इस जॉब से काफी खुश हूं। मुझे अपनी कंपनी से बहुत प्यार है और मैं इसे दिल से चाहती हूं क्योंकि मैंने यहां कई सारी नई चीजें सीखी हैं। मुझे विश्वास हैं कि 'खास' और आकाश सर मेरी जिंदगी बदल देंगे।
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