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नॉन-नेट फेलोशिप: छात्रों ने निकाला विरोध मार्च, स्मृति ईरानी को भी आना पड़ा गेट से बाहर

एबीवीपी का कहना है, ''यह सब नाटक कम्युनिष्ट छात्रों की शाखा द्वारा प्रधानमंत्री मोदी की छवि को खराब करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

नॉन-नेट फेलोशिप: छात्रों ने निकाला विरोध मार्च, स्मृति ईरानी को भी आना पड़ा गेट से बाहर

नई दिल्ली. गुरूवार को विभिन्न छात्रों के संगठनों ने नॉन नेट फेलोशिप को समाप्त किए जाने को लेकर विरोध प्रदर्शन किया गया। छात्रों ने यूजीसी कार्यालय से लेकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय कार्यालय तक मार्च निकालकर विरोध प्रदर्शन किया।

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डीएनए इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक छात्रों के इस विरोध मार्च के बाद मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी को मंत्रालय के गेट से बाहर आना पड़ा। ईरानी ने छात्र-छात्राओं से मुलाकात की लेकिन प्रदर्शनकारी उनके आश्वासन से संतुष्ट नहीं थे।

रिपोर्ट के मुताबिक जेएनयूएसयू के अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि एचआरडी मंत्री ईरानी के कुछ आश्वासन हैं लेकिन वे इस मसले का निश्चित हल चाहते हैं। उन्होंने आगे कहा समिति आगे की कार्रवाई पर फैसला करेंगे।रिपोर्ट के मुताबिक योगेंद्र यादव के नेतृत्व में स्वराज अभियान के कार्यकर्ता भी प्रदर्शनकारियों के साथ शामिल हुए और उनके साथ एकजुट होकर मार्च किया।

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जानकारी के मुताबिक इस दौरान शांति व्यवस्था और कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। हालांकि मानव संसाधन विकास मंत्रालय के गेट के बाहर एक छोटा सा हंगामा छोड़कर छात्रों का विरोध शांतिपूर्ण रहा। मार्च के दौरान ट्रैफिक जाम भी हुआ।

रिपोर्ट के मुताबिक बताया जा रहा है कि तकरीबन दो सप्ताह पूर्व अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का एक प्रतिनिधिमंडल मिल चुका था। उन्हें भी मंत्री द्वारा नॉन नेट फेलोशिप के मुद्दे पर आश्वासन दिया गया था।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय सचिव रोहित चहल का कहना है, 'यह सब नाटक कम्युनिष्ट छात्रों की शाखा द्वारा प्रधानमंत्री मोदी की छवि को खराब करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। एचआरडी मंत्री द्वारा हमें पहले ही नॉन नेट फेलोशिप के मुद्दे को हल करने के लिए आश्वासन दिया गया है। लेकिन ये वामपंथी छात्र उपद्रव और गड़वड़ी पैदा करने के लिए हर कीमत पर इस मुद्दे को दूसरी तरफ मोड़ रहे हैं।

नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, पूरी खबर-

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