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पाञ्चजन्य पर उबले जेएनयू के छात्र, बोले मैगजीन मांगे माफी

पाञ्चजन्य में जेएनयू के बारे में लिखा गया है कि यह एक विशाल, राष्ट्रविरोधी समूह का अड्डा है।

पाञ्चजन्य पर उबले जेएनयू के छात्र, बोले मैगजीन मांगे माफी
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नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखपत्र पाञ्चजन्य द्वारा जेएनयू को राष्ट्रविरोधी ताकतों का अड्डा बताने पर छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने इसकी कडे शब्दों में निंदा की है। हरिभूमि के साथ बात करते हुए कन्हैया कुमार ने कहा कि आरएसएस एक प्रोपेगेंडा के तहत इस तरह की बातें फैलाता रहता है। उन्होंने कहा कि हम सभी के लिए बराबरी के लिए लड़ते हैं अगर आरएसएस की नजर में वह देश विरोधी है तो हम हैं....। अपनी फेसबुक वॉल पर कन्हैया कुमार ने लिखा है कि हमें ब्रिटिश, मुसोलिनी, हिटलर और यूएसए के ऐजेंटों से देशभक्त का सर्टिफिकेट लेने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि पाञ्चजन्य के एडिटर को इस लेख के लिए माफी मांगनी होगी, अगर वो माफी नहीं मांगते तो हम पाञ्चजन्य के ऑफिस पर प्रोटेस्ट करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने ‪#‎SaveJNUfromRSS‬ के साथ ऑनलाइन कैंपेन चलाने की अपील की है। उन्होंने लिखा है कि मैं पाञ्चजन्य के इस लेख की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं, यह पूरे जेएनयू समुदाय का अपमान है।
इस मामले पर जेएनयू से ही सुयश सुप्रभ अपनी वॉल पर लिखते हैं कि, "पाञ्चजन्य वह पत्रिका है जो 'अवतरित' हुई थी। अपनी वेबसाइट पर संघियों ने यही लिखा है। वामपंथियों की पत्रिकाएँ 'निकलती' हैं और संसाधनों की कमी के कारण मर-खप जाती हैं। इस मामले में हम इस पत्रिका का मुकाबला नहीं कर सकते हैं। समस्या यह है कि इस पत्रिका के पास विचार जैसा कुछ नहीं है। इसके नए अंक में जेएनयू को राष्ट्रद्रोहियों का अड्डा बताया गया है। बताने वाले सज्जन कोई जासूस लगते हैं जिन्होंने कई कार्यक्रमों में जेएनयू के प्रोफ़ेसरों को देश की अखंडता को तोड़ने की साज़िश करते सुना। क्या पता उन्होंने रिकॉर्डिंग भी की हो। मेरी कल्पना के घोड़े दौड़ रहे हैं। किसी प्रोफ़ेसर ने कहा होगा, "जॉन से मुझे नोटों से भरी अटैची लेनी है। दलितों को हिंदुओं से अलग़ करने के लिए मैंने पाँच कार्यक्रम किए। मामला 50 लाख में तय हुआ था।" पाञ्चजन्य की पत्रकारिता में बहुत जान है। मार-धाड़ और उत्तेजना से भरे दृश्यों वाली पत्रकारिता में यह नंबर वन है। अगर आप बोर हो रहे हों तो यह पत्रिका आपको निराश नहीं करेगी।"
ये लिखा है पाञ्चजन्य में
पाञ्चजन्य में जेएनयू के बारे में लिखा गया है कि यह एक विशाल, राष्ट्रविरोधी समूह का अड्डा है जिसका उददेश्य भारत को विघटन करना है। मुखपत्र के कवर लेख में दावा किया गया है कि जेएनयू के नक्सल समर्थक छात्र संघों ने वर्ष 2010 में छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में हुए नक्सली हमले में सीआरपीएफ के 75 जवानों की मौत का खुलेआम जश्न मनाया था। मुखपत्र ने कहा कि यह सब जेएनयू प्रशासन की नाक के नीचे हुआ था। इसमें आरोप लगाया गया है कि जेएनयू नियमित रूप से राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का आयोजन करता है। एक अन्य लेख में आरोप लगाया गया है कि जेएनयू एक ऐसा संस्थान है जहां राष्ट्रवाद को एक अपराध समझा जाता है। भारतीय संस्कृति को तोड़मरोड़ कर पेश करना आम बात है। वहां कश्मीर से सेना हटाए जाने का समर्थन किया जाता है। लेख में कहा गया है कि जब सोवियत संघ का विघटन हुआ तो जेएनयू जैसे संस्थानों में एक नया राजनीतिक विचार उभरा जिसने अपना राजनीतिक नारा ‘क्लास स्ट्रगल’ से ‘कास्ट स्ट्रगल’ में बदलना शुरू कर दिया।
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