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गोवध का विरोध करता रहा है जमियत-उलमा-ए-हिन्द

मुस्लिम धार्मिक गुरु, धार्मिक नेता और उलेमा जहां अमन-चैन कायम रखने में सरकार की मदद में आगे आएं हैं

गोवध का विरोध करता रहा है जमियत-उलमा-ए-हिन्द

नई दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी से सटे उत्तर प्रदेश के दादरी गांव में कथित तौर पर गौमांस खाने के कारण अखलाक नामक व्यक्ति की हत्या के बाद स्थानीय प्रशासन जहां हालात को बिगड़ने से रोकने के लिए हर संभव कदम उठा रहा है, वहीं राज्य व केंद्र सरकार भी किसी प्रकार की चूक से बच रही है।

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मुस्लिम धार्मिक गुरु, धार्मिक नेता और उलेमा जहां अमन-चैन कायम रखने में सरकार की मदद में आगे आएं हैं तो वहीं जमियत-उलमा-ए-हिंद के नेता भी माहौल को बिगड़ने न देने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। तकरीबन एक करोड़ से ज्यादा सदस्यों वाली यह संस्था आजादी के बाद से ही कोशिश में रही है कि किसी भी सूरत में मुस्लिम गाय की कुर्बानी न दें। संस्था का दावा है कि इस मुहिम में उसे सफलता भी मिली। अब संस्था एक- दूसरे की धार्मिक भावनाओं की कद्र करने की अपील करती है।

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जमियत-उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने बताया कि जमियत-उलमा-ए-हिंद आजादी के बाद से ही इस मामले में संवेदनशील रहा है। आजादी के बाद संस्था की कार्यकारिणी समिति की एक बैठक में शिरकत करते हुए देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद ने मुसलमानों से खास तौर पर यह अपील की थी कि मुसलमानों को स्वेच्छा से गो वध छोड़ देना चाहिए। आजाद ने बैठक में जोर देते हुए कहा था कि सरकार इसके लिए कानून बनाए या न बनाए लेकिन मुसलमानों को गाय की कुर्बानी से खुद को दूर रखना चाहिए।
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