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यूरोपीय संघ ने कहा भारत में हैं थर्ड जेंडर्स की रक्षा के कानून

यूरोपियन संघ के राजनायिक ने भारत में ट्रांसजेंडर्स की रक्षा के कानून की तारीफ की

यूरोपीय संघ ने कहा भारत में हैं थर्ड जेंडर्स की रक्षा के कानून
नई दिल्ली. यूरोप में समलैंगिकों को अपने यौन चयन के कारण हिंसा या नफ़रत का सामना करना पड़ता है। यूरोपीय संघ द्वारा करवाए गए एक सर्वेक्षण में शामिल एक चौथाई समलैंगिकों ने माना कि पिछले सात साल में उन पर या तो हमला किया गया है या फिर हिंसा की धमकियां दी गई हैं। वहीं अमेरिकन सेंटर में शुक्रवार को एलजीबीटी समुदाय के अधिकारों पर हुई चर्चा में यूरोपियन संघ के राजनायिक ने भारत में ट्रांसजेंडर्स की रक्षा के कानून की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा भारत में उन्हें थर्ड जेंडर का दर्जा प्राप्त है।
बता दें कि ऑरलैंडो के एक नाईट क्लब में हुई गोलाबारी में लगभग 49 लोग मारे गए थे। जिस समय यह घटना हुई उस दौरान क्लब में समलैंगिक पार्टी चल रही थी। बताया जा रहा है कि हमलावर युवक समलैंगिकों से घृणा करता था। इसी पृष्ठभूमि पर अमेरिकन सेंटर में 'प्राउड मंथ' नाम से एक अंतर्राष्ट्रीय चर्चा का आयोजन किया गया था। जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, स्पेन, नॉर्वे, स्वीडन, कनाडा, यूरोपीय संघ व भारत के राजनायिक शामिल हुए थे।
चर्चा में अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, स्पेन, नॉर्वे, स्वीडन, कनाडा और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल ने कहा की भारत में समलैंगिक, गे-समलैंगिक , उभयलिंगी, ट्रांसजेंडर और इंटरसेक्स (LGBTI) समुदाय के लिए कानून है। भारत देश में इनको थर्ड जेंडर का दर्जा प्राप्त है जो ख़ुशी की बात है। सभी देशों को इससे सीख लेने की जरूरत है। यह एक बड़ा बदलाव हो सकता है।
यूरोपीय राजनायिक थाइबॉल्ट डेवेनले ने यूरोप और भारत के बीच सम्बन्धों पर कहा कि भारत से हमारे राजनीतिक रिश्ते बहुत अच्छे हैं। भारत और यूरोपीय संघ के बीच मानव अधिकारों को लेकर काफी संवाद हुए हैं, लेकिन यह एक गम्भीर विषय है।
उन्होंने कहा कि हम भारत पर कोई उंगली नहीं उठा रहे हैं। भारत हमेशा ही वैध सवाल उठाता है। हर विषय पर चर्चा जारी है। उन्होंने कहा कि सिर्फ एलजीबीटी समुदाय के अधिकारों को उठाना ही इस चर्चा का विषय नहीं है, लेकिन इस पर सोचने की जरूरत है। यह मुद्दा अब लगातार बढ़ रहा है।
डेवेनले ने एलजीबीटी समुदाय के लिए भारत के कानून की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि भारत में इस समुदाय को थर्ड जेंडर कहा जाता है। मैं इससे बाकि राज्यों मे भी लागू किये जाने से काफी प्रभावित हुआ हूं। उन्होंने कहा कि भारत में जो कानून है वह फ़्रांस और दूसरे देशों के पास भी नहीं है।
अमेरिका के उप प्रमुख मिशेल माइकल पेलेशियर ने कहा कि सभी देश अपनी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। कोई भी मुद्दा किसी एक देश के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है लेकिन दूसरे के लिए नहीं। ऐसे मामलों में हमको लचीला बनना होगा। ये सामाजिक मुद्दे हैं जो समाज से ही आते हैं।
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