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उच्च शिक्षा में बढ़ी महिलाओं की रुचि, कॉलेजों में पर्याप्त नहीं महिला शिक्षकों की संख्या

शिक्षण संस्थानों में महिला शिक्षकों की संख्या पर्याप्त नहीं है।

उच्च शिक्षा में बढ़ी महिलाओं की रुचि, कॉलेजों में पर्याप्त नहीं महिला शिक्षकों की संख्या
नई दिल्ली. उच्च शिक्षा में महिलाओं की रुचि तो तेजी से बढ़ रही है, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए केंद्रीय विवि, कॉलेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों में महिला शिक्षकों की संख्या पर्याप्त नहीं है।
इजाफा करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती
महिला शिक्षकों की संख्या में इजाफा करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। हालांकि इससे निपटने के लिए केंद्र ने तैयारी करना भी शुरू कर दिया है। उच्च शिक्षण संस्थानों में महिला शिक्षकों की कमी का खुलासा 'अखिल भारतीय उच्चतर शिक्षा सर्वेक्षण 2014-15' की रिपोर्ट में हुआ है, जिसे सोमवार को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने यहां राजधानी में जारी किया। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के हिसाब से सकल नामांकन दर (जीईआर) 23.6 फीसदी हो गई है। इसे 2030 तक 30 फीसदी के लक्ष्य तक पहुंचाया जा सकता है। महिलाओं का रुझान उच्च शिक्षा की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
महिला शिक्षकों की कमी
लेकिन हमारे सामने बड़ी चुनौती इसी तादाद में महिला शिक्षकों की संख्या में भी इजाफा करने का है। उन्होंने कहा कि महिला शिक्षकों की कमी के मामले पर मैंने मंत्रालय में उच्च-शिक्षा विभाग के सचिव वीएस ऑबेराय को विशेष प्रयास करने को कहा है। ईरानी ने कहा कि आगामी 2015-16 के सर्वेक्षण में हम गुजरात के सुझावों को शामिल करेंगे। इसमें कार्यक्रम में गुजरात के प्रमुख सचिव पंकज जोशी द्वारा सुझाए गए तीन बिंदु शामिल हैं, जिनमें टीचर का प्रोफाइल सर्वे में शामिल किया जाना, ब्लॉक स्तर से डेटा एकत्रित करना और डिस्टेंस मोड पर जो छात्र हैं, उन्हें भी सर्वे में शामिल करना मुख्य है। 12वीं पंचवर्षीय योजना में 2030 तक जीईआर 30 फीसदी तक किए जाने का जो लक्ष्य रखा गया था। उसे आज आए 23.6 फीसदी के जीईआर के आंकड़ें के हिसाब से प्राप्त किया जा सकता है।
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