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तमिलनाडुः एक ही स्कूल के 50 बच्चों का दाखिला डीयू के इस कॉलेज में

पिछले साल 36 स्टूडेंट ने और इसी साल 28 स्टूडेंट ने भी एसआरसीस में दाखिला लिया था।

तमिलनाडुः एक ही स्कूल के 50 बच्चों का दाखिला डीयू के इस कॉलेज में
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चेन्नई/नई दिल्ली. दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में बीकॉम (एच) पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए पहले दिन ही तमिलनाडु से 160 उम्मीदवारों में से लगभग 110 ने अप्लाई किया। इसमें चौकाने वाली बात यह है कि 50 स्टूडेंट एक ही स्कूल के हैं जिसका नाम भारतीय विद्या भवन (इरोड) है।

टाइम्स ऑफ इंडिया
की ख़बर के मुताबिक, दिल्ली कॉलेज शिक्षकों का कहना है कि यह बड़ी बात है कि कैसे एक संस्था इतने सारे बच्चों को एक साथ देश के टॉप कॉमर्स कॉलेज के लिए तैयार कर सकती है।

इस मामले में एसआरसीसी प्रिंसिपल आर पी रस्तोगी का कहना है कि सभी एडमिशन मेरिट और योग्यता के आधार पर होंगे।

आपको बता दें कि प्रवेश प्रक्रिया में शामिल कुछ कर्मचारियों ने टाइम्स ऑफ इण्डिया को बताया कि तमिलनाडु के कुछ एवरेज स्टूडेंट अपने मार्क्स के बिल्कुल उलट हैं। उन्होंने कहा कि हमने उनसे कुछ आसान से सवाल पूछे जिनका उनके पास कोई सही जबाब नहीं था।

हालांकि भारतीय विद्या भवन स्कूल के प्रिंसिपल एन एस कर्थिकियानी का कहना है कि हमारे कॉलेज के शिक्षकों को इस बात पर कोई संदेह नहीं है। कॉलेज में एडमिशन 12वीं क्लास में पाए मार्क्स की मेरिट के आधार पर होना है। उन्होंने कहा कि पिछले साल 36 स्टूडेंट ने और अभी इसी साल 28 स्टूडेंट ने भी एसआरसीस में दाखिला पाया था। इसके साथ ही दिल्ली का श्री राम और बंगलौर का क्राइस्ट कॉलेज भी हमारे स्टूडेंट की पसंद रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि एसआरसीसी योग्यता के आधार पर प्रवेश के लिए जाना जाता है और यह हमारे लिए अच्छा है इस मामले में हम एक रिकॉर्ड बनाएंगे। पिछले साल भारतीय विद्या भवन स्कूल में लगभग 162 कॉमर्स स्टूडेंट थे। इनमे से 53 छात्रों ने 100% वाणिज्य में, 61% एकाउंटेंसी में, 48% बिजनेस मैथ्स में और 11% अर्थशास्त्र में हासिल किये थे।
तमिलनाडु के ही एक कॉलेज स्टूडेंट सी श्रीभुवन ने बताया कि 12वीं के बाद उसने भी एसआरसीसी में के लिए सोचा और यहां उसे एक कठिन कोर्स का सामना पड़ा। उसने बताया कि कॉमर्स के बाद वह सिविल सेवा में जाना चाहता था इसलिए किसी ने उसे इस कॉलेज में एडमिशन लेने की सलाह दी। उसका कहना था कि बोर्ड एग्जाम देने के बाद उसे लगा कि कि वह एसआरसीसी के क्वालीफाई एग्जाम के लिए बिल्कुल तैयार है।

श्रीमन अधिथ का कहना हैं कि हमें कक्षा 11 के पहले दिन से ही एसआरसीसी के क्वालीफाई एग्जाम को बारीकी से पढ़ाया गया। इसमें कोई घपलेबाजी नहीं हुई है।

हालांकि कुछ स्टूडेंट ने एसआरसीसी के सवालों का जबाब नहीं दिया था, जिसको देखकर लगता है कि पश्चिमी तमिलनाडु में लोकल स्कूल रटना सिखा रहे हैं। इसके उलट कर्थिकियानी ने बयान दिया कि हो सकता है हमारे स्टूडेंट्स से अलग तरीके के सवाल पूछे गए हो।

इस मामले में एसआरसीसी कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल पीसी जैन का कहना है कि तमिलनाडु और केरल बोर्ड हाल के वर्षों में तेजी से आगे बढ़े हैं। पीसी जैन पहले ही 9 एडमिशन सेशन का संचालन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली यूनिवर्सिटी सभी राज्यों के लिए आकर्षक का केंद्र बना हुआ है। आजकल अन्य राज्यों के शिक्षा बोर्ड स्टूडेंट्स को हाई मार्क्स देकर एडमिशन के लिए भरोसा दिला देते हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी में सभी राज्यों को बराबर समझा जाता है और यहां सिर्फ मार्क्स से योग्यता साबित नहीं होती है।

जैन ने इस बात पुष्टि करते हुए कहा कि तमिलनाडु और केरल के स्टूडेंट पिछले तीन सालों से लगातार दिल्ली यूनिवर्सिटी में अपनी पैठ बना रहे हैं। उनका कहा है कि स्टेट बोर्ड्स को अंको की बजाय शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि नई एजुकेशन पॉलिसी में यह विचार किया जा रहा है कि कॉलेज एडमिशन में भी अखिल भारतीय परीक्षा जैसा ही स्कॉलस्टिक्स एप्टीट्यूड टेस्ट लिया जाएगा।

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