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दिल्लीः प्रदूषण हुआ और जहरीला, भ्रूण के जीन में बदलाव का खतरा

दिल्ली में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है

दिल्लीः प्रदूषण हुआ और जहरीला, भ्रूण के जीन में बदलाव का खतरा
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नई दिल्ली. दिल्ली में वायु और ध्वनि प्रदूषण का स्तर इस हद तक बताया जा रहा है कि गर्भवती महिलाओं के पेट में पल रहे भ्रूण के जीन में बदलाव का खतरा बढ़ने लगा है। इस खतरे को लेकर जहां चिकित्सकों की राय एक है वहीं प्रदूषण पर शोध करने वाले भी मानते है कि दिल्ली में ऐसा होने की संभावना ज्यादा है।
प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार लगातार कार्य कर रही है। दिल्ली सरकार जहां सम-विषम योजना, विभिन्न एजेंसियों के साथ मिलकर इसको कम करने की कोशिश कर रही है, वहीं केंद्र सरकार यातायात पर कंट्रोल करने की योजना पर कार्य कर रही है। इसके बावजूद दिल्ली में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है।
दूसरी ओर दिवाली के त्योहार के दौरान प्रभावी रूप से वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए दिल्ली के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने भी एंटी फायर क्रेकर के प्रभाव को कम करने के लिए पर्यावरण विभाग, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, लाइसेंसिंग यूनिट दिल्ली पुलिस, पेट्रोलियम एवं एक्सपोजर सुरक्षा संगठन जिला मजिस्ट्रेट, एसडीएम सहित सभी सम्बन्धित एजेसियों के साथ मिलकर अभियान चलाया हुआ है। पर्यावरण मंत्री ने डीपीसीसी और एसडीएम की अध्यक्षता में दिल्ली में अवैध रूप से आयतित पटाखों पर रोक लगाने का काम शुरू कर दिया है।
किचन में ना गुजारें समय
एम्स में मेडिसिन के डॉ. वीरसिंह का कहना है कि दिल्ली में बाहर के अलावा घर में काफी होता है। ज्यादातर घरेलू महिलाएं अधिक समय किचन में ज्यादा सयम गुजारती है। जिसके कारण जीन में बदलाव की संभावना बढ़ जाती है।
कई पीढ़ियों पर पड़ता है प्रभाव
सेंटर फॉर ऑक्यूपेशनल ऐंड इंवायरनमेंटल हेल्थ के निदेशक टी. के. जोशी ने बताया कि वायु प्रदूषण के संपर्क में आने पर कन्या भ्रूण के जीन तक में बदलाव आ जाता है और ये परिवर्तन ऐसे होते हैं जो केवल उस तक सीमित नहीं रहते। उन्होंने आगे बताया कि इसका प्रभाव आगे की कई पीढ़ियों पर पड़ता है। इसका मतलब है कि उसके बच्चे, उसके नाती-पोते भी इससे प्रभावित होंगे। जीन में आए परिवर्तन को सुधारा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि इस पर अभी नियंत्रण नहीं पाया गया तो हम अस्थमा, कैंसर और मस्तिष्काघात जैसे कई रोगों को जन्म देंगे जिनका कोई इलाज हमारे पास नहीं होगा।
पर्यावरण विभाग ने एक कंट्रोल रूम बनाया
पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ध्वनि उत्सर्जक पटाखे चलाने पर पूर्ण प्रतिबंध है। हुसैन ने डीपीसीसी को यह निर्देषित किया कि दिवाली की रात एवं उससे पहले वायु एवं ध्वनि के स्तर की जांच अवश्य की जानी चाहिए। इसके लिए पर्यावरण विभाग ने एक कंट्रोल रूम बनाया है, जिससे अवैध पटाखों की बिक्री पर रोक एवं नियमित निरीक्षण रिपोर्ट की निगरानी की जा सके।
कड़ी कार्रवाई के निर्देश
अपने-अपने क्षेत्र के एसडीएम, डीपीसीसी और दिल्ली पुलिस की टीमों को अपने क्षेत्रों में निरीक्षण और तेज करने और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देष दिए है। इसके अलावा लोगों के बीच जागरुकता अभियान भी चलाया जाएगा।
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