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छात्र ऑनर्स के साथ सर्टिफिकेट कोर्स में भी ले सकते हैं दाखिला

दिल्ली यूनिवर्सिटी के अंडरग्रेजुएशन कोर्सेज में दाखिले के लिए हिंदी का पेपर लेना जरूरी नहीं है।

छात्र ऑनर्स के साथ सर्टिफिकेट कोर्स में भी ले सकते हैं दाखिला
नई दिल्ली. दिल्ली यूनिवर्सिटी के नॉर्थ कैंपस स्थित कॉन्फ्रेंस सेंटर में शुक्रवार को आयोजित ओपन डेज में आने वाले छात्रों ने दाखिला प्रक्रिया में हुए बदलावों की जानकारी ली। कई छात्रों ने स्ट्रीम चेंज करने पर कितने फीसदी मार्क्‍स कम होंगे, इससे संबंधित सवाल पूछे। इसके अलावा कट ऑफ आने के बाद कितने दिनों का समय मिलेगा, इससे संबंधित सवाल भी कई छात्रों ने किए। विशेषज्ञों ने छात्रों को बताया कि कट ऑफ आने के बाद दाखिले के लिए तीन दिन का समय छात्रों को दिया जाएगा।
कट ऑफ मार्क्‍स से मिलान वाले अंतिम छात्र को भी डीयू में दाखिला मिलेगा। इसके अलावा कोई नियम या पॉलिसी नहीं है। छात्रा अवंतिका ने गर्ल्स के लिए कट ऑफ में डिस्काउंट से संबंधित प्रश्न पूछे। डीयू अधिकारियों ने बताया कि गर्ल्स के लिए कॉलेजों में अधिकतम एक फीसदी तक का कट ऑफ में डिस्काउंट दिया जाएगा। हालांकि यह पूरी तरह से कॉलेज पर निर्भर करता है। कॉलेज द्वारा किसी एक सब्जेक्ट में गर्ल्स को दिया गया डिस्काउंट सभी विषयों में मान्य होगा। छात्र मनीष ने पूछा कि डीयू में कितने फॉरेन लैंग्वेज में सर्टिफिकेट कोर्स उपलब्ध है।
विशेषज्ञों ने बताया कि कई फॉरेन लैंग्वेज में सर्टिफिकेट कोर्स कराया जाता है। छात्र ऑनर्स के साथ सर्टिफिकेट कोर्स में भी दाखिला ले सकते हैं। छात्रों का सवाल फॉर्म में दिए गए कॉलम से भी था। दिल्ली यूनिवर्सिटी के अंडरग्रेजुएशन कोर्सेज में दाखिले के लिए हिंदी का पेपर लेना जरूरी नहीं है। ऐसे छात्र जिन्होंने सिर्फ आठवीं तक ही हिंदी की पढ़ाई की है, वे बगैर हिंदी के भी ग्रेजुएशन कर सकते हैं। डीयू डीन ऑफ एग्जामिनेशन ने यूजी कोर्सेज में हिंदी की अनिवार्यता खत्म किए जाने की साउथ इंडियन और नॉर्थ-ईस्ट के छात्रों की मांग पिछले साल ही पूरी कर दी थी।
छात्रों के लिए यूजी में हिंदी का पेपर लेना अब जरूरी नहीं है। डीयू के सिलेबस के अनुसार यूजी कोर्सेज में दाखिले के लिए हिंदी उन छात्रों के लिए अनिवार्य है, जिन्होंने 10वीं तक हिंदी की पढ़ाई की है। ऐसे छात्र जिन्होंने 10वीं तक हिंदी की पढ़ाई नहीं की है, सिर्फ आठवीं तक हिंदी का एक पेपर रहा है, वे राजनीति विज्ञान और फिलासफी विषय लेकर ग्रेजुएशन कोर्स में दाखिले के लिए आवेदन कर सकते हैं। बता दें कि साउथ इंडियन और नॉर्थ-ईस्ट के कई छात्र ग्रेजुएशन के अन्य विषयों में तो अच्छा कर जाते हैं लेकिन हिंदी पेपर में फेल हो जाते हैं। ऐसे में हिंदी की अनिवार्यता करियर के लिहाज से भी उन छात्रों के लिए मुश्किल साबित हो रहा था।
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