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कनॉट प्लेसः नशेड़ी चुरा रहे है लाखों के एस्कलेटर्स के पार्ट्स

इस एस्कलेटर के रखरखाव की जिम्मेदारी जॉनसन लिफ्ट्स नाम की कंपनी की है।

कनॉट प्लेसः नशेड़ी चुरा रहे है लाखों के एस्कलेटर्स के पार्ट्स
नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली में नशेड़ियों की कमी नहीं है। ये अपने नशे के चक्कर में कुछ भी जो इन्हें मिलता है उसे कबाड़ में बेच देते हैं। ऐसे ही कनॉट प्लेस के कई सबबे में लगी स्वचालित सीढ़ियां जल्दी-जल्दी खराब हो जाती हैं। इसके पीछे का कारण चोरी और देखरेख की कमी है।
इस एस्कलेटर के रखरखाव की जिम्मेदारी जॉनसन लिफ्ट्स नाम की कंपनी की है। कंपनी के सर्विस मैनेजर हरिदास जॉनसन बताते हैं, 'पिछले कुछ सालों से ड्रग्स के आदी नशेड़ी और बाकी लोग एस्कलेटर के हिस्सों को चुरा रहे हैं। वे रात के समय ऐसा करते हैं, जब एस्कलेटर बंद होता है। वे इसमें लगा महंगा मेटल प्लेटफॉर्म और केबल चुरा लेते हैं और फिर इसे कबाड़ की तरह बेच देते हैं।'
सीढ़ियों में लगा स्टील प्लेटफॉर्म विदेशों से आयातित होता है। इसके साथ ही, महंगा सेंसर प्लेट और 4.4 मीटर से अधिक मोटाई वाले तांबे के तारों पर चोरों की सबसे ज्यादा नजर होती है।
हरिदास बताते हैं, 'कबाड़ में बेचने पर इनके लिए 500 से कुछ हजार रुपए तक मिल जाते होंगे। लेकिन इन्हें बदलने या दोबारा लगाने में बहुत पैसे लगते हैं। ये चोर इतने बेधड़क होकर काम करते हैं कि 70-80 किलो से भी ज्यादा भारी प्लेट्स को हटाने से भी नहीं हिचकते।' प्लेटफॉर्म्स और तारों को बदलने में करीब ढाई लाख रुपए लग जाते हैं और इन्हें विदेशों से मंगवाना पड़ता है। इन एस्कलेटर्स की मरम्मत में अबतक सरकारी खजाने को 35 लाख से अधिक का चूना लग चुका है।
चोरी किए गए हिस्सों को चीन से मंगवाना पड़ता है और इन्हें आने में कई महीनों का वक्त लग जाता है। एक बार जिस एस्कलेटर के हिस्से चुरा लिए जाएं, तो उसे फिर से शुरू करने में करीब 6 महीने का समय लगता है। हरिदास कहते हैं, 'हमें लोगों को जागरूक करना होगा और निगरानी बढ़ानी होगी।
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