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सूखे पर सख्त हुई केंद्र सरकार, राहत पैकेज को लेकर राज्यों को लगाई फटकार

तेरह राज्यों में खासकर पेयजल की समस्या से निपटने की दिशा में तल्ख भरे निर्देश जारी कर साफ कर दिया है

सूखे पर सख्त हुई केंद्र सरकार, राहत पैकेज को लेकर राज्यों को लगाई फटकार
नई दिल्ली. देश के आधे राज्य जल संकट की तरफ जा रहे हैं, जिनमें तेरह राज्यों में गहराते जा रहे ज्यादा जल संकट का ठीकरा केंद्र सरकार ने राज्यों के सिर फोड़ना शुरू कर दिया है।
तेरह राज्यों में खासकर पेयजल की समस्या से निपटने की दिशा में तल्ख भरे निर्देश जारी कर साफ कर दिया है कि केंद्र से जारी पैकेज से राज्य ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल किल्लत से निपटने में फ्रीहैंड हैं। इसलिए पानी संबंधी शिकायत केंद्र तक नहीं पहुंचनी चाहिए। फिलहाल देश में सभी प्रमुख 91 जलाशयों में पानी का स्तर तेजी से गिरने से 18 राज्यों में जल संकट की आशंका बनी हुई है और इनमें तेरह राज्यों जिनमें मराठवाड़ा और बुंदेलखंड भयंकर जल संकट रडार पर आ चुके हैं।
केंद्र सरकार ने इन तेरह राज्यों को ग्रामीण पेयजल योजना के तहत 819 करोड़ रुपये की पहली किस्त भी जारी कर दी है, जबकि इन राज्यों के पास पहले से ही इस योजना में 2365 करोड़ रुपये का अधिशेष है। ऐसे में केंद्र सरकार ने तर्क दिया है कि पेयजल समस्या से निपटने के लिए तमाम आर्थिक स्रोत के लिहाज से केंद्र ने इन राज्यों को फ्रीहैंड किया हुआ है। इसके बावजूद हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश जैसे नौ राज्यों में लातूर जैसे जल संकट की आशंका बनी हुई है।
निगरानी के निर्देश
देश में जल संकट खासकर पेयजल के मामले में केंद्र सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के सचिव ने 13 राज्यों के प्रमुख सचिवों को तल्ख अंदाज वाले एक पत्र में केंद्र द्वारा जुटाए गए तमाम आर्थिक स्रोतों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि राज्यों को ऐसी स्थिति मे किसी भी कीमत पर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को पीने के पानी से इनकार नहीं करना चाहिए।
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