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दिल्ली में फिर लौटा डेंगू, अस्पतालों में बढ़ी भीड़, कोशिशें नाकाम

डेंगू के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए दिल्ली सरकार ने 55 डिस्पेंसरी में फीवर क्लीनिक खोले हैं।

दिल्ली में फिर लौटा डेंगू, अस्पतालों में बढ़ी भीड़, कोशिशें नाकाम
नई दिल्ली. राजधानी के सरकारी, निगम व निजी अस्पतालों में डेंगू वार्ड के अलावा डेंगू के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए अन्य वार्ड को फौरी तौर पर डेंगू वार्ड में तब्दील कर लोगों को राहत देने की कोशिश की गई है। डेंगू के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए दिल्ली सरकार ने 55 डिस्पेंसरी में फीवर क्लीनिक खोले हैं। प्रारंभ में तो लोगों को डिस्पेंसरी में डेंगू के इलाज की जानकारी नहीं थी लेकिन सरकार द्वारा रेडियो व अन्य माध्यमों से विज्ञापन के बाद वहां इलाज के लिए भीड़ बढ़ने लगी। फीवर क्लीनिक में दो शिफ्टों में डॉक्टर डेंगू मरीजों की जांच कर रहे हैं।
वहीं डेंगू के गंभीर मरीजों को बड़े अस्पताल में रेफर कर रहे हैं। फीवर क्लीनिक में बुखार से पीड़ित अपने बेटे की जांच करवाने आईं सरिता ने बताया कि हम पास में ही रहते हैं लेकिन यहां डेंगू का इलाज होता है जानकारी नहीं थी। मेरे पड़ोस में रहने वाले ने बताया तो मैं बेटे को लेकर यहां आई हूं। हालांकि बड़े अस्पतालों की तरह फीवर क्लीनिक में मरीजों की भीड़ नहीं है लेकिन नजदीक में ही इलाज की सुविधा मुहैया है।
राजधानी के राम मनोहर लोहिया अस्पताल न्यू ब्लॉक में बने डेंगू वार्ड में भले ही मरीजों की संख्या फिलहाल उपलब्ध बेड के अनुपात में ही हो लेकिन इमरजेंसी वार्ड की स्थिति बढ़ते मरीजों के कारण चरमरा गई है। न्यू ब्लॉक की इमरजेंसी डेंगू मरीजों से भरने के बाद, ओल्ड ब्लॉक स्थित इमरजेंसी वार्ड में भी डेंगू के मरीजों को भर्ती किया गया है। यहां एक बेड दो मरीजों को अलॉट किया गया है। हालांकि डेंगू के शिकार मरीज तो इसी बात से खुश है कि उन्हें अस्पताल में बेड मिल गया लेकिन परिजन दबी जुबान में बेड की संख्या और बढ़ाए जाने की बात कह रहे हैं, ताकि कुछ सहूलियत हो।
शहादरा निवासी अवनीश ने बताया उसे नाक से ब्लड आने बाद अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। उन्होंने बताया कि डॉक्टर बहुत ही अच्छे हैं। अस्पताल में किसी तरह की परेशानी नहीं है। वहीं अस्पताल के न्यू ब्लॉक के दूसरे फ्लोर पर बने डेंगू वार्ड में भर्ती दीपा के पिता ने बताया कि प्लेटलेट्स कम होने के बाद बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के इलाज के बाद प्लेटलेट्स की संख्या 10 हजार से बढ़कर 40 हजार तक पहुंच गई है।
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