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जहरीली हवा में सांस ले रहे हैं हम, दिल्ली-एनसीआर में 34 फीसदी लोगों को सांस की बीमारी

महिलाओं और बच्चों को सांस संबंधी बीमारियां होने का जोखिम ज्यादा है।

जहरीली हवा में सांस ले रहे हैं हम, दिल्ली-एनसीआर में 34 फीसदी लोगों को सांस की बीमारी

नई दिल्ली. घरों व ऑफिस में जहरीली हवा लोगों को बीमार बना रही है। हाल ही में हुए एक सर्वे से पता चलता है कि घरों के अंदर की हवा प्रदूषित होती है। इस सर्वे में खुलासा हुआ है कि ऑफिस व घर में समय बिताने वाले कुल 34 फीसदी लोग जहरीली हवा से जुड़ी कई बीमारियों से पीड़ित है। यह सर्वे क्लीन एयर इंडिया मूवमेंट (क्लेम) ने अर्टिमस अस्पताल के साथ मिलकर किया है।

इस बारे में सर्वे की अगुवाई कर रहे अर्टिमस अस्पताल के श्वसन व क्रिटिकल केयर विभाग के हेड डॉ. हिमांशु गर्ग का कहना है कि आमतौर पर हम बाहरी वायु प्रदूषण की ही बात करते है, लेकिन जो लोग बहुत ज्यादा समय अंदर बिताते है, उन्हें अंदर की हवा की गुणवत्ता की जांच करते रहना बहुत आवश्यक है। सर्वे में दिल्ली, गुड़गांव और नोएडा के ऑफिस व घरों में रहने वाले 1500 लोगों को शामिल किया गया जिनकी औसतन उम्र 39 वर्ष थी।

वल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्ट्टीयूट के श्वसन एलर्जी व एप्लाइड इम्यूनोलॉजी विभाग के हेड डॉ. राज कुमार का कहना है, बाहरी प्रदूषण के मुकाबले अंदर की अस्वस्थ हवा भी उतनी या उससे ज्यादा खतरनाक होती है। हम लोग ज्यादातर समय अंदर बिताते है तो अंदरूनी हवा से जुड़े रिस्क होने की ज्यादा संभावना रहती है। महिलाओं और बच्चों को सांस संबंधी बीमारियां होने का जोखिम ज्यादा है। महिलाओं को सीओपीडी हो सकता है तो बच्चों में अस्थमा के गंभीर लक्षण हो सकते है।

प्रदूषण विकराल: सीएसई

सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरॉमेंट (सीएसई) ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली की प्रदूषण की समस्या 'खत्म होने से कहीं दूर' है । सीएसई ने यह टिप्पणी इसलिए की क्योंकि उसके विश्लेषण में यह बात सामने आई है कि हर रोज दूसरे राज्यों से राष्ट्रीय राजधानी में आने वाले वाहनों की संख्या हर साल दिल्ली में पंजीकृत होने वाले वाहनों की कुल संख्या के करीब है। सीएसई की ओर से वास्तविक समय में किए गए सीमा पार यातायात सर्वेक्षण में कहा गया कि बाहर से आने वाले निजी एवं यात्री वाहन कुल प्रदूषक भार (टोटल पार्टिकुलेट लोड) के 22 फीसदी हैं।

जो दिल्ली में प्रदूषण पर नियंत्रण के उपायों को न सिर्फ बेअसर कर रहे हैं बल्कि पार्किंग सुविधाओं के लिए जमीन की भारी मांग भी पैदा कर रहे हैं । संस्था ने कहा कि ट्रकों से होने वाले प्रदूषण पर लगाम लगाना अच्छा कदम है, लेकिन ये दिल्ली के लिए काफी नहीं है क्योंकि ये कारों के लिए एक 'प्रदूषण हाइवे' है ।

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