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दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बहुत ही गंभीर : सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट ने यह भी कहा, हमारे लिए बहुत ही शर्मिन्दगी की वजह बन गया है दिल्ली का बढ़ता प्रदूषण

दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बहुत ही गंभीर : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली. दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को 'बहुत ही गंभीर' बताते हुए उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि इस संकट को हल करने के लिये 'बहुआयामी' दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है और इसके लिये राजधानी में आवश्यक वस्तुयें लाने वाले वाहनों के अलावा डीजल से चलने वाले सभी ट्रकों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाना पड़ सकता है। न्यायालय ने केंद्र सरकार से कहा कि इस मामले में सभी भागीदारों से परार्मश करके 'सर्वमान्य न्यूनतम स्वीकार्य कार्यक्रम' पेश किया जाए।

शीर्ष अदालत ने कहा कि, जब विदेशी मेहमान दिल्ली आते हैं और राजधानी में प्रदूषण के अत्यधिक स्तर की ओर इशारा करते हैं तो यह हमारे लिए बहुत ही शर्मिन्दगी की वजह बनता है। पीठ ने कहा कि प्रदूषण बर्दाश्त नहीं करने वाली सीमा दिल्ली को दुनिया के सर्वाधिक प्रदूषित शहर के रूप में बदनाम कर रही है।

पीठ ने कहा कि एक जनवरी से निजी कारों के लिए एक एक दिन चलने की अनुमति देने संबंधी 'सम और विषम नंबर की नीति' आपातकालीन उपाय है। पीठ ने कहा कि, यह बहुत ही गंभीर मामला है और दिल्ली के सबसे अधिक प्रदूषित शहर होने के कारण दुनिया में बदनामी हो रही है।

न्यायालय इसके साथ ही वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे द्वारा अंतरिम उपाय के रूप में दिए गए सुझावों पर विचार के लिए सहमत हो गया। साल्वे का सुझाव था कि हर किस्म के डीजल से चलने वाले ट्रकों का दिल्ली में छह सप्ताह के लिए प्रवेश प्रतिबंधित किया जाए ताकि यह पता लगाया जा सके कि ऐसा करने से क्या पहले से ही दूषित वायु की गुणवत्ता में 'स्पष्ट' बदलाव आया है।

ज्ञात हो शीर्ष अदालत ने 12 अक्तूबर को अपने आदेश में कहा था कि एक नवंबर से दिल्ली में प्रवेश करने वाले हल्के वाणिज्यिक वाहनों को 700 रुपये ओर तीन एक्सेल वाले वाहनों को 1300 रुपये की दर से पर्यावरण हर्जाना शुल्क अदालत करना होगा। न्यायालय ने कहा यह आदेश प्रयोग के रुप में चार महीने तक अगले साल 29 फरवरी तक प्रभावी रहेगा। न्यायालय ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया था कि इस संबंध में उचित अधिसूचना जारी की जाये।

प्रदूषण पर होगा जुर्माना

दिल्ली में प्रदूषण फैलाने पर भारी जुर्माना लग सकता है। स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि 20 हजार स्क्वायर मीटर से अधिक के प्रोजेक्ट पर दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति की नजर रहेगी। 400 से 20 हजार स्क्वायर मीटर के प्रोजेक्ट की जांच के लिए एसडीएम व एमसीडी अधिकारियों को पावर दी गई है। यह औचक निरीक्षण कर जुर्माना कर सकते हैं।

धूल कणों से बढ़ रही डायबिटीज

प्रदूषण प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से जीवनशैली संबंधी कई बीमारियों को दावत दे रहा है। डायबिटीज व दिल के दौरे जैसी बीमारियों का कारण बन रहे वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर से स्वास्थ्य विशेषज्ञों के माथे पर बल पड़ गया है। सांस के द्वारा खून में मिलकर प्रदूषण प्रो-इनफलेमेट्री पदार्थ पैदा करता है, जिससे एंडोथिलायल काम करना बंद कर देता है, परिणामस्वरूप डायबिटीज और दिल के रोग हो जाते हैं। भारतीयों के धूल कणों के लगातार संपर्क में रहने से एंडोथिलायल काम करना बंद कर देता है।

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