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हाईकोर्ट का केंद्र, दिल्ली सरकार और एमसीडी को नोटिस, ''डेंगू रोकने के लिए क्या किया''

प्रमुख न्यायाधीश ने तीन नगर निगमों और एनडीएमसी से भी बीमारी की रोकथाम के लिए के बारे में जानकारी देने को कहा है।

हाईकोर्ट का केंद्र, दिल्ली सरकार और एमसीडी को नोटिस,
नई दिल्ली. दिल्ली सरकार भी अब हरकत में आने लगी है। सरकार ने तीनों एमसीडी और एनडीएमसी से इस बाबत रोजाना अपडेट मांगी है। इस बीच अस्पतालों में बिस्तर और इलाज को लेकर मरीजों का बुरा हाल है। राजधानी में डेंगू से अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है प्रमुख न्यायाधीश जी रोहिणी और न्यायमूर्ति जयंत नाथ की पीठ ने तीन नगर निगमों और नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) से भी बीमारी की रोकथाम के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी देने को कहा है।
पीठ ने इसे एक गंभीर मामला बताते हुए केंद्र, दिल्ली सरकार, नगर निगमों और एनडीएमसी को नोटिस जारी करके 24 सितंबर से पहले अपना लघु शपथपत्र दायर करने को कहा है। नोटिस जारी करने वाली अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता को यह जनहित याचिका दायर करने से पहले इस बारे में पूरी जानकारी एकत्र कर लेनी चाहिए थी क्योंकि इस संबंध में पहले भी अन्य रिट याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं।
इस बीच अदालत ने उन अस्पतालों के निदेशकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश देने से परहेज किया जिन्होंने डेंगू से मरने वाले एक सात वर्षीय बच्चे का उपचार करने से कथित रूप से इनकार कर दिया था। उस बच्चे के माता-पिता ने भी बाद में आत्महत्या कर ली थी। कानून की एक छात्रा गौरी ग्रोवर ने एक याचिका दायर करके प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिए जाने की मांग की है। याचिका में दावा किया गया है कि अस्पतालों की बेरुखी के कारण बच्चे की मौत हो गई। अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील सत्य रंजन स्वेन से अतिरिक्त दस्तावेज पेश करने को कहा जो ये दिखा सकें कि अस्पतालों की ओर से लापरवाही हुई थी।
इस बीच दिल्ली सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील राहुल मेहरा ने अदालत को सूचित किया कि उसने डेंगू के मरीजों के उपचार के लिए पर्याप्त कदम उठाए हैं और यहां निजी अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या बढ़ाने की प्रक्रिया जारी है। याचिका में कहा गया है कि बच्चे के माता-पिता का सुसाइड नोट ‘पूरी तरह से यह बात साबित करता है कि उन्हें अस्पताल के अधिकारियों की बेरुखी के कारण आत्महत्या करने पर मजबूर होना पड़ा। उनकी बेरुखी के कारण उनके इकलौते बेटे की मौत हो गई। उसमें कहा गया है कि अस्पताल के अधिकारियों का कृत्य स्पष्ट रूप से भारतीय दंड संहिता की धारा 306 ( आत्महत्या के लिए उकसाने) के तहत आता है।
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