Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

दिल्ली: बन रहे ''लंदन जैसे हालात'', स्मॉग से मर गए थे 4 हजार लोग

दिल्ली में हर साल 10 से 30 हजार लोग वायु प्रदूषण की वजह से मारे जाते हैं।

दिल्ली: बन रहे
नई दिल्ली. दिवाली के बाद से दिल्ली और एनसीआर में छाई धुंध और वायु प्रदूषण ने 17 साल के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। राजधानी दिल्ली में लोग घरों से निकलते वक्त मास्क का उपयोग तक करने लगे हैं। हवा में जहर सा घुल गया है जिसके कारण सांस लेना भी दुभर होता जा रहा है। हवा इतनी जहरीली हो चुकी है कि एक्सपर्ट्स ने चेतावनी तक दे डाली है कि अगर हालात जल्द न सुधरे तो लंदन में 1952 में हुई हजारों मौतों जैसी स्थिति भारत में भी हो सकती है।
खराब एयर क्वॉलिटी
शहर की हवा की क्वॉलिटी रविवार को इस सीजन के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। वहीं, खराब एयर क्वॉलिटी में 24 घंटे का औसत अधिकतम सीमा के पार जाने का अंदेशा है। राजधानी में कई जगहों पर सांसों के जरिए नुकसान पहुंचाने वाले प्रदूषक PM 2.5 और PM 10 से जुड़ी रियल टाइम रीडिंग हवा के सुरक्षित स्तर से 17 गुनी ज्यादा थी।
एयर क्वॉलिटी इंडेक्स का आंकड़ा 500 के पार
दिल्ली में रविवार शाम चार बजे 24 घंटे का एयर क्वॉलिटी इंडेक्स का स्तर 497 पर पहुंच गया। यह सीजन के सबसे खराब स्तर अधिकतम 500 से महज तीन ही कम है। 500 का स्तर दिवाली के बाद पहुंच गया था। सीपीसीबी और अन्य संस्थाओं की ओर से चलाए जा रहे मॉनिटरिंग स्टेशनों के आउर्ली (हर घंटे) एयर क्वॉलिटी इंडेक्स का आंकड़ा 500 के पार है, जो अधिकतम सीमा से भी ज्यादा है।
लंदन के जैसे हालात
एनबीटी की खबर के मुताबिक, एक्सपर्ट्स का कहना है कि शहर की हवा में सल्फर डाई ऑक्साइड (SO2) की मात्रा फिलहाल नियंत्रण में है। हालांकि, अन्य मानदंडों की बात करें मसलन-हवा में मौजूद कई किस्म के छोटे कण, तो हालात वैसे ही खराब हैं, जैसे 1952 में लंदन के थे।
लंदन में 1952 में स्मॉग की वजह से 4 हजार लोगों की असामयिक मौत
सेंटर फॉर साइंस एंड इन्वाइरनमेंट (CSE) की अनुमित्रा रॉयचौधरी ने कहा, 'लंदन में 1952 में स्मॉग की वजह से 4 हजार लोगों की असामयिक मौत हो गई। उस वक्त एसओटू के उच्च स्तर के अलावा PM लेवल भी 500 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था।'
उन्होंने कहा, 'यहां एसओटू का स्तर भले ही उतना ज्यादा न हो, लेकिन दिवाली पर हवा में कई तरह की गैसों का स्तर बढ़ा है। कुल मिलाकर हवा जहरीली कॉकटेल में तब्दील हो गई है। अगर प्रदूषण का यह स्तर बरकरार रहा तो दिल्ली में भी असामयिक मौतें हो सकती हैं।'
बता दें कि सीएसई ने इस साल अपनी रिपोर्ट में कहा था कि दिल्ली में हर साल 10 से 30 हजार लोग वायु प्रदूषण की वजह से मारे जाते हैं।
खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि, हमें फॉलो करें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर-
Next Story
Top