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सवालों के घेरे में स्वच्छता कर! दिल्ली सरकार ने केंद्र पर साधा निशाना

माकपा ने सरकार से यह घोषित करने की मांग की कि स्वच्छ भारत पहल में पीएम मोदी से जुड़े प्रचार पर कितनी राशि खर्च हुई।

सवालों के घेरे में स्वच्छता कर! दिल्ली सरकार ने केंद्र पर साधा निशाना
नई दिल्ली. केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए स्वच्छता कर पर दिल्ली सरकार ने प्रश्न उठाए हैं। जल व पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि देशवासियों से लिए गए स्वच्छ भारत टैक्स का इस्तेमाल कैसे होगा? दिल्ली में साफ सफाई का जिम्मा दिल्ली नगर निगम पर है। ऐसे में उनके कार्य के लिए केंद्र सरकार टैक्स क्यों वसूल रही है? उन्होंने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि पीएम के विदेश दौरों में होने वाले बड़े-बड़े शो का खर्चा निकालने के लिए यह स्वच्छ भारत टैक्स तो नहीं लगाया गया है। उन्होंने कहा कि सफाई के लिए मोदी सरकार के पास कोई प्लान ही नहीं है। सरकार का सभी सेवाओं पर 0.5 फीसदी का स्वच्छ भारत सेस लगाने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद देय सेवाओं पर सर्विस टैक्स की प्रभावी दर 14.5 फीसदी हो जाएगा।
बता दें कि स्वच्छता कर के कारण खाना-पीना, घूमना, रेल यात्रा, हवाई यात्रा, मकान बनवाना, होटल में कमरे किराये पर लेना, बीमा की पॉलिसी खरीदना, बैंकिंग सेवाएं लेना, टेलीफोन कॉल करना, ट्रांसपोर्ट से सामान भेजना सहित अन्य सेवाएं रविवार से महंगा हो गया है। चालू वित्त वर्ष में यह दूसरा मौका है, जब सर्विस टैक्स के मद में बढ़ोतरी हो रही है। इससे पहले बीते एक जून को इसका दर 12.36 फीसदी से बढ़ाकर 14 फीसदी की किया गया था।
येचुरी ने कहा अतिरिक्त भार पड़ेगा
केंद्र द्वारा लगाए गए स्वच्छ भारत उपकर की आलोचना करते हुए माकपा ने रविवार को कहा कि इस लेवी से पहले से ही परेशान आदमी की जेब पर अतिरिक्त भार पड़ेगा। इसके साथ ही पार्टी ने सरकार से यह घोषित करने की मांग की कि स्वच्छ भारत पहल में पीएम मोदी से जुड़े प्रचार पर कितनी राशि खर्च हुई। माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि हम चाहते हैं कि सरकार देश और संसद को यह बताए कि पीएम से जु़ड़े स्वच्छ भारत विज्ञापनों पर कितनी राशि खर्च हुई। आपने वह राशि प्रचार पर खर्च की और उसके बाद उसके वित्तपोषण के लिए लोगों से पैसे एकत्र कर रहे हैं।
व्यापारी और उपभोक्ता परेशान
महंगाई से व्यापारी वर्ग व उपभोक्ता पहले ही परेशान था। इस टैक्स के बाद समस्या और बढ़ेगी। इस संबंध में व्यापारियों का कहना है कि वस्तुओं के दाम बढ़ने के साथ ही बिक्री पर असर पड़ रहा है। पिछले कुछ समय से लगातार टैक्स में बढ़ोतरी हो रही है। सामान के दाम बढ़ने के बाद लोग उसे लेना ही छोड़ रहे हैं। वहीं ग्राहकों का कहना है कि महंगाई जिस तेजी से बढ़ रही है, उस तेजी से आय नहीं बढ़ती। ऐसे में लोगों को अन्य विकल्प तलाशने पड़ रहे हैं। आय सीमित होने के कारण खरीद की सीमा तय करनी पड़ रही है।
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