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कब चलेंगी महिला स्पेशल बसें! आम आदमी पार्टी ने दिया था भरोसा

निर्भया कांड के तीन साल बीत बाद भी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर दिल्ली सरकार की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

कब चलेंगी महिला स्पेशल बसें! आम आदमी पार्टी ने दिया था भरोसा
नई दिल्ली. निर्भया कांड के तीन साल बीत जाने के बाद भी दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर दिल्ली सरकार की तरफ से अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। वर्ष 2012 में घटित घटना के बाद तत्कालिन सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले आम आदमी पार्टी के मुखिया व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने महिलाओं के लिए महिला स्पेशल बसें नहीं होने पर सवाल खड़े किए थे। बाद में विरोध-प्रदर्शन के दौरान केजरीवाल और उनकी पार्टी ने भरोसा दिलाया था कि सत्ता में आने पर महिला स्पेशल बसों का संचालन फिर से शुरू किया जाएगा, लेकिन आम आदमी पार्टी के सत्ता में आए करीब 10 माह का वक्त बीत चुका है। बावजूद इसके महिला स्पेशल बसों के संचालन के लिए कोई ठोस पहल सरकार की ओर से नहीं की गई है। हैरानी की बात यह है कि एक भी रूट पर बस का संचालन नहीं शुरू किया जा सका है।
26 रूटों पर चलती थी बसें
बंद की गई महिला स्पेशल बसें राजधानी में करीब 26 रूटों पर सुबह और शाम के वक्त चलती थीं। इस वक्त अन्य बसों में ज्यादा भीड़ होती थी। डीटीसी की ओर से तर्क दिया गया था कि इन बसों को घाटा बढ़ने की वजह से बंद किया गया था, लेकिन हकीकत यह है कि स्पेशल बसों को मात्र दिन और रात के वक्त चलाया जाता था, जबकि पूरे दिन यह बसें अन्य यात्रियों के लिए भी चलती थीं।

इन रूटों पर थीं ये बसें
महिला स्पेशल बसें डीटीसी की रूट नंबर-830 उत्तम नगर से नेहरू प्लेस, 820 - द्वारका मोड़ से नेहरु प्लेस, 845 - इंद्र पुरी से दिल्ली सचिवालय, 1740 - शिवाजी स्टेडियम से रोहिणी सेक्टर - 22, 815- शाहदरा से आरके पुरम, 1730- मोरी गेट से कापसहेड़ा बॉर्डर,821- हर्ष विहार से करमपुरा, 850- नांगलोई सैय्यद से दिल्ली सचिवालय के बीच चला करती थी। फिलहाल इन रूटों पर ये बसें बंद हो चुकी हैं।
सीसीटीवी की प्रक्रिया धीमी
महिला स्पेशल बसों के साथ यह भी कहा गया था कि डीटीसी की सभी बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, लेकिन आज जीमनी सच्चाई यह है कि मात्र 200 बासों में ही सीसीटीवी कैमरे लग सके हैं, जबकि 1000 बसों में लगाने का काम चल रहा है। वहीं, मात्र 2000 होम गार्ड की तैनाती मार्शल के रूप में की गई है, जबकि जरूरत 5000 मार्शलों की है।

2009 में हुई थी शुरू
राजधानी में कामकाजी महिलाओं की सुविधा के लिए 'महिला स्पेशल बसों का संचालन' तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने वर्ष 2009 में की थी, लेकिन वर्ष 2012 में यह बसें बंद कर दी गई थी।
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