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3 महीने बाद दर्ज कराई बलात्कार की FIR, कोर्ट ने किया खारिज

अदालत ने कहा कि पीड़ित महिला ने सही तथ्य पेश नहीं किए।

3 महीने बाद दर्ज कराई बलात्कार की FIR, कोर्ट ने किया खारिज
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नई दिल्ली. दिल्ली की एक अदालत ने महिला से बलात्कार के मामले में एक आरोपी को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि इस मामले में महिला की गवाही को भरोसा करने योग्य नहीं माना जा सकता। घटना पिछले वर्ष 2016 की है। विवाहित महिला ने आरोप लगाया था कि हरियाणा के एक होटल के कमरे में उसके साथ बलात्कार किया गया था।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण कुमार ने दक्षिण पश्चिम दिल्ली के निवासी को राहत देते हुए कहा कि एफआईआर दर्ज करने में लगभग तीन महीने का विलंब हुआ है जिसका अभियोजन पक्ष द्वारा कोई उचित स्पष्टीकरण भी नहीं दिया गया है।
अदालत ने कहा कि घटना के बाद आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाने का महिला के पास पर्याप्त मौका था। उनकी यह बात भरोसा करने योग्य नहीं है कि उन्होंने आरोपी के खिलाफ शिकायत इसलिए दर्ज नहीं करवाई क्योंकि वह डरी हुई थीं।
अदालत ने आगे कहा कि महिला के बयानों की पड़ताल करने पर लगता है कि उन्होंने सही तथ्य पेश नहीं किए। महिला के इस बयान के पक्ष में कोई मेडिकल रिपोर्ट सबूत के तौर पर भी नहीं है कि आरोपी ने उसका बलात्कार किया था। अदालत ने कहा कि प्राथमिकी दर्ज करने में हुआ विलंब, गवाहों के बयान और परिस्थितियों को देखकर संदेह पैदा होता है। उनका बयान भरोसा करने लायक नहीं है और पारिस्थितिजन्य सबूत भी इसका समर्थन नहीं करते हैं। दोनों की अनुपस्थिति में अदालत का यह मानना है कि आरोपी को बरी किया जाना चाहिए।
पिछले साल जून महीने में पीड़ित महिला ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने मार्च 2016 में हरियाणा के बहादुरगढ में एक होटल के कमरे में उसके पानी में नशीला पदार्थ मिलाकर उसका बलात्कार किया था। पडोसी होने के नाते महिला आरोपी को सात साल से जानती थी। आरोपी का कहना था कि उसने महिला के पति को पैसे उधार दिए थे और जब वापस मांगे तो दंपति ने उसके खिलाफ झूठा मामला दर्ज करवा दिया।
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