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अपने चहेतों की जेब भर रहे हैं सीएम केजरीवाल, विजेंद्र गुप्ता ने जताई कड़ी आपत्ति

गुप्ता ने कहा कि पैनल अधिवक्ताओं को अभी तक प्रत्येक केस के लिये कुल मिलाकर 45 सौ रुपए मिलते थे।

अपने चहेतों की जेब भर रहे हैं सीएम केजरीवाल, विजेंद्र गुप्ता ने जताई कड़ी आपत्ति

नई दिल्ली. विधायकों की तर्ज पर स्टेडिंग काउंसिल, पब्लिक प्रोसेक्युटर्स तथा प्रोसेक्युटिंग अधिकारियों की फीस व पारिश्रमिक को 600 गुना बढ़ाने के मामले पर विधानसभा में नेता विपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कड़ी आपत्ति जताई है। गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल इसी बहाने आप पार्टी के अपने चुनिंदा कार्यकर्ताओं को जोकि वकालत से जुड़े हैं को लाभ पहुंचाने का काम कर रहे हैं। उपरोक्त वृद्धि से वकालत से जुड़े आम आदमी पार्टी के प्रवक्ताओं तथा सर्मथकों को सीधा लाभ पहुंचाया गया है। गुप्ता ने कहा कि राहुल मेहरा जो आप के प्रवक्ता रहें हैं तथा पार्टी से लंबे समय से जुड़े रहें हैं, उन्हें दिल्ली सरकार की तरफ से सिविल तथा अपराधिक मामलों के स्टेंडिंग काउंसिल के रूप में 5 से 6 लाख रुपये प्रतिमाह पार्शिमिक देने का प्रावधान किया गया है ।

यह सामान्य सरकारी स्तर से काफी ऊंचा पार्शिमिक है। स्टेडिंग काउंसिल का मासिक पार्शिमिक 25 हजार से बढ़ाकर 1 लाख 10 हजार कर दिया है । सचिवीय सुविधाओं के लिये व्यय की राशि 10 हजार से बढ़ाकर 30 हजार कर दी है। अतिरिक्त काउंसिल के लिये मासिक पार्शिमिक 20 हजार से बढ़ाकर 90 हजार कर दिया गया है। जबकि सचिवीय सेवाओं के लिये सहायता राशि 5 हजार से बढ़ाकर 30 हजार कर दी हैं। फीस की दर 45 सौ प्रति केस से बढ़ाकर 8 हजार रुपए प्रति केस प्रतिदिन कर दी गई है। गुप्ता ने कहा कि पैनल अधिवक्ताओं को अभी तक प्रत्येक केस के लिये कुल मिलाकर 45 सौ रुपए मिलते थे और अब यह राशि बढ़ाकर 2 हजार रुपए प्रति केस प्रतिदिन कर दी गई है।
अतिरिक्त जनअभियोजकों के वर्तमान पार्शिमिक 8 सौ रुपये प्रति केस को बढ़ाकर 3 हजार प्रति केस प्रतिदिन किया जा रहा है । सरकारी अधिकारियों के वेतनमानों में भी काफी वृद्धि की गई। उन्होंने कहा कि निदेशक अभियोजन का वेतनमान 15 हजार 600 व 39 हजार100 रुपये से बढ़ाकर 37 हजार व 68 हजार तक कर दिया गया है । सहायक जन अभियोजक का वेतनमान 9300-34800 रुपये से बढ़ाकर 15,600-39,100 रुपये कर दिया गया है।
गुप्ता ने सवाल उठाए कि क्या कारण है कि एकाएक 600 गुणा तक बढ़ोत्तरी के इस प्रस्ताव को केबिनेट के समक्ष यह प्रस्ताव बहुत जल्दबाजी में तथा गैरजिम्मेदाराना तरीके से लाया गया और इसे तुरंत मंजूरी भी दे दी गई। इससे जहां एक ओर सरकारी खजाने पर करीब 7000 करोड़ रुपयों का अतिरिक्त भार डाल दिया है।

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