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हिसाब 2015: दिल्ली में बढ़ा अपराध का ग्राफ, वाहन चोर रहे नंबर वन

बढ़ते वाहन चोरी के मामलों को देखते हुए पुलिस ने कई योजनाएं बनाईं।

हिसाब 2015: दिल्ली में बढ़ा अपराध का ग्राफ, वाहन चोर रहे नंबर वन
नई दिल्ली. साल 2015 अस्त होने वाला है। इस समय इस साल का लेखा जोखा आना जरूरी है। आज हम बात कर रहे हैं दिल्ली और अपराध की। इस साल राजधानी में बढ़ते अपराधों में सबसे पहला नंबर वाहन चोरों का है। दैनिक घटनाक्रमों को देखें तो चोर चुस्त और पुलिस सुस्त नजर आई है।

2015 के आंकड़े
2015 के आंकड़ों पर नजर डालें तो एक जनवारी से 31 अक्टूबर तक पुलिस के समक्ष 26576 शिकायतें आईं। करीब 26650 वाहन चोरी हुए। पुलिस कर्रवाई करते हुए कुल 1676 ही वाहन बरामद कर पाई और 1469 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें 13 ऑटो उठाने वाले गैंग के लोग शामिल हैं।
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार वाहन चोरों को पकड़ने के लिए प्रत्येक जिले में वाहन चोरी-निरोधक दस्ता (एएटीएस) की टीम बनाई गई है। यह टीम वाहन चोरों की धड़पकड़ के लिए बनाई गई है। जिससे वाहन चोरी के मामले में कमी आए, लेकिन आंकड़े सब बता रहे है।
किए कई प्रयास
पुलिस सूत्रों की मानें तो बढ़ते वाहन चोरी के मामलों को देखते हुए पुलिस ने कई योजनाएं बनाईं। जिसमें वार्धित पुलिस उपस्थिति और गश्त, प्रत्येक थाने में क्षेत्राधिकार में अपराध के पैटर्न के आधर पर असुरक्षित क्षेत्रों की पहचान,मोटर बाइकों पर युवाओं की लगातार जांच,आपराधी गिरोह की कार्रवाई के संबंध में विशेषज्ञ यूनिटों के साथ-साथ जिला पुलिस द्वारा समग्र (मैक्रो) सूचना इक्ट्ठा करना और प्रभावित व असुरक्षित क्षेत्रों में अवरोध (नाका) लगाना।
एप भी किया लॉन्च
दिल्ली पुलिस ने वाहन चोरी की सूचना देने, एफआईआर दर्ज कराने,अंतिम पुलिस रिपोर्ट प्राप्त करने और बीमा का दावा करने में शामिल नेमी हस्तचलित प्रक्रियाओं से बचने के लिए एक वेब आधारित एमवी (मोटर वाहन) एप भी शुरू किया। ऐसे में चोरी की शिकायतें तो बढ़ी पर चोरी कम नहीं हुई।
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