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मिग-27 विमान हादसा: वायुसेना ने दिए जांच के आदेश

इस वर्ष दुर्घटनाग्रस्त हुआ दूसरा लड़ाकू विमान

मिग-27 विमान हादसा: वायुसेना ने दिए जांच के आदेश
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नई दिल्ली. जोधपुर वायुसैन्यअड्डे से करीब पांच किलोमीटर की दूरी पर दुर्घटनाग्रस्त हुए मिग-27 विमान हादसे को लेकर वायुुसेना ने जांच के आदेश (कोर्ट आॅफ इंक्वारी) दे दिए हैं। इससे घटना के असल कारणों का खुलासा हो सकेगा। हादसे में पायलट सुरक्षित है। विमान ने एयरबेस से सुबह 11 बजकर 8 मिनट पर उड़ान भरी थी और यह 11 बजकर 33 मिनट पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। वायुसेना ने अपनी प्राथमिक जांच के आधार पर कहा है कि हादसे में कोई स्थानीय नागरिक घायल नहीं हुआ है। हादसे के बाद मिग-27 विमान के बेड़े में शामिल सभी विमानों को ग्राउंड नहीं किया गया है।
नहीं हुई कोई जनहानि
यहां वायुसेना मुख्यालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक यह घटना सोमवार को एयरबेस से कुछ किलोमीटर की दूरी पर कुड्डी आवासीय कॉलोनी में उस वक्त हुई जब यह लड़ाकू विमान अपने नियमित प्रशिक्षण उड़ान मिशन से एयरबेस की ओर लौट रहा था। जोधपुर के पुलिस आयुक्त अशोक सिंह राठौड़ के अनुुसार लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त होकर एक मकान के पास गिरा। हादसे में किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं है। विमान के गिरने से एक चार पहिया वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। दुर्घटना की सूचना मिलते ही अग्निशमन दल ने पंहुच कर लड़ाकू विमान में लगी आग बुझायी। प्रशासन, पुलिस और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गये।
इस वर्ष दूसरा विमान हादसा
आंकड़ों के हिसाब से इस वर्ष यह वायुसेना के किसी लड़ाकू विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने का दूसरा हादसा है। इससे पहले बीते मई महीने में बल का एक मिग-21 लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। 1999 में करगिल युद्ध के दौरान एक मिग-27 विमान लापता हो गया था। इसके बाद 2001 से अब तक कुल 12 मिग-27 विमान हादसों का शिकार हो चुके हैं। 2010 में पश्चिम बंगाल के सिलिगुड्डी के पास दुर्घटनाग्रस्त हुए मिग-27 विमान हादसे के बाद वायुसेना ने कुल करीब 150 विमानों के बेड़े को ग्राउंड क र दिया था। हादसे की वजह विमान के इंजन में खामी को बताया गया था। बीते वर्ष 2015 में राजस्थान के बाड़मेर में भी एक मिग-27 विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था।
33 स्क्वाड्रन से काम चलाती वायुसेना
देश के पश्चिमी और पूर्वी मोर्च से दुश्मन के एकसाथ हमला करने पर वायुसेना के पास जवाबी कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त लड़ाकू विमान नहीं हैं। इस तथ्य का खुलासा कई बार बल के वरिष्ठ अधिकारी भी कर चुके हैं। अभी वायुसेना के पास लड़ाकू विमानों की कुल 33 स्क्वाड्रन यानि लगभग 600 लड़ाकू विमान हैं। जबकि लड़ाकू विमानों के स्क्वाड्रन की आधिकारिक संख्या 42 होनी चाहिए। एक स्क्वाड्रन में 16 (न्यूनतम) और 18 (अधिकतम) लड़ाकू विमान होते हैं। मिग-27 विमान लंबे से बल में सेवा दे रहे हैं। इस साल मार्च महीने से इनका विदाई कार्यक्रम शुरू होना था और तेजस विमानों को इनकी जगह लेनी थी। बल की योजना वर्ष 2018 तक मिग-27 विमानों को पूरी तरह से बेड़े से सेवामुक्त करने की है।
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