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जीएसटी लागू करने की कवायद पर तेजी में सरकार

समय से पहले शुरू हो सकता है संसद का शीतकालीन सत्र

जीएसटी लागू करने की कवायद पर तेजी में सरकार
नई दिल्ली. केंद्र सरकार अगले साल एक अप्रैल से जीएसटी कानून लागू करने की कवायद में जुटी है। इसी मकसद से जीएसटी विधेयक को पारित कराने के लिए संसद के शीतकालीन सत्र को समय से पहले शुरू कराने की तैयारी है।सूत्रों के अनुसार सरकार संसद के शीतकालीन सत्र को तय समय से एक पखवाड़ा पहले ही बुलाने पर विचार कर रही है, जिसका मकसद है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक को पारित कराया जा सके।
पिछले मानसून सत्र में सरकार इससे जुड़ संविधन (122वें संशोधन) विधेयक को पारित करा चुकी है, जिसे संसद के शीतकालीन सत्र से पहले कम से कम 15 राज्यों से पारित कराने का सिलसिला जारी है और कई राज्य संविधन (122वें संशोधन) विधेयक को पास कर चुके हैं।
सूत्रों के अनुसार यदि संसद का शीतकालीन सत्र थोड़ा पहले शुरू होता है तो केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) और एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) विधेयकों को नवंबर या दिसंबर के शुरू में पारित करवाया जा सकेगा। इन विधेयकों के पारित होने से जीएसटी के कार्यान्वयन का मार्ग प्रशस्त होगा और सरकार इसे एक कानून के रूप में एक अप्रैल 2017 से देश में लागू कर सकेगी।
इससे पहले राज्यों से पारित संविधान संशोधन विधेयक पर शीतकालीन सत्र के लिए इन दोनों विधेयकों को मसौदा तैयार करने की भी चुनौती है। हालांकि संसद का शीतकालीन सत्र आमतौर पर नवंबर के तीसरे या चौथे सप्ताह में होता है, लेकिन इस साल सरकार इसे त्योहारी सीजन समाप्त होते ही तुरंत बाद बुलाना चाहती है।
सरकार की यह है योजना
सरकार का मानना है कि नई राष्ट्रीय कर प्रणाली को आधे राज्यों की विधानसभाओं की मंजूरी मिलने के बाद जीएसटी परिषद को सक्रिय किया जा सकता है कि ताकि कर दरों, स्लैब व छूट आदि का फैसला किया जा सके। अधिकारी ने कहा कि विधेयकों को अगर शीतकालीन सत्र में मंजूरी मिल जाती है तो इससे एक अप्रैल 2017 से जीएसटी के कार्यान्वयन की तैयारी के लिए पर्याप्त समय होगा।
कई राज्यों में लग चुकी मुहर
संसद के मानसून सत्र में संविधन (122वें संशोधन) विधेयक को अब तक असम, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, गुजरात, बिहार जैसे आठ राज्य मंजूरी दे चुके हैं। ये सभी राज्य उक्त दोनों विधयेक के संविधान संशोधन विधेयक के सर्मथन में हैं, जिन्हें संसद के मानसून सत्र में पारित किया गया था। अभी इसे कानून बनाने के लिए कम से कम सात और राज्यों की मंजूरी जरूरी है, हालांकि इसे मंजूरी के लिए सभी 31 राज्यों को भेजा गया है।
खास बातें
-समय से पहले शुरू हो सकता है संसद का शीतकालीन सत्र
-शीत सत्र से पहले कम से कम 15 राज्यों में विधेयक पारित कराने का प्रयास
-एक अप्रैल 2017 से कानून लागू करने के प्रयास में है सरकार
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