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जनवरी से एम्स में बिना नकदी के इलाज, मरीजों को मिलेंगे प्रीपेड कार्ड

एम्स के सभी विभागों को प्रीपेड कार्ड दिए जाएंगे।

जनवरी से एम्स में बिना नकदी के इलाज, मरीजों को मिलेंगे प्रीपेड कार्ड
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नई दिल्ली. दिल्ली के एम्स में नया फारमान जारी हुआ है। जनवरी से एम्स में बिना नकदी के इलाज होगा। एम्स प्रबंधन ने कैशलेस व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने का फैसला किया है। इसके लिए सभी विभागों को प्रीपेड कार्ड जारी किए जाएंगे। प्रीपेड कार्ड में मरीज जांच से लेकर सर्जरी और दवाओं की अनुमानित धनराशि का रिचार्ज करा सकेगें।
दिल्ली के एम्स में 5 जनवरी से इलाज कराने के लिए नकदी रखने की जरूरत नहीं होगी। एम्स प्रबंधन ने कैशलेस व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने का फैसला किया है। इसके लिए सभी विभागों को प्रीपेड कार्ड जारी किए जाएंगे। वहीं आधार कार्ड के बिना मरीजों से 10 गुना पंजीकरण फीस वसूली जाएगी। एम्स के सभी विभागों को प्रीपेड कार्ड दिए जाएंगे, कार्ड से मरीज जांच से लेकर सर्जरी और दवाओं की अनुमानित धनराशि का रिचार्ज करा सकेगें।
मरीजों को प्रीपेड कार्ड का अधिक फायदा-
यह सुविधा भर्ती मरीजों के लिए अनिवार्य होगी, जबकि ओपीडी मरीजों के लिए इसे वैकल्पिक रखा गया है। एम्स की तकनीकी सुविधा और कंम्यूटराइजेशन सेवा के प्रमुख डॉ. दीपक अग्रवाल ने बताया कि प्रीपेड कार्ड का सबसे अधिक फायदा यह होगा कि मरीजों को इलाज के लिए लाने वाले पैसों के खोने का डर नहीं होगा, जैसा अक्सर होता है।

भर्ती होते ही मरीज को मिलेगा कार्ड-
भर्ती कराने पर पंजीकरण कराने के साथ ही मरीज को कार्ड जारी कर दिया जाएगा, जो उसके संस्थान में भर्ती रहने तक मान्य होगा। यह व्यवस्था आरपी सेंटर, सीएनसी सहित कैंसर विभाग और सभी प्रमुख विभागों में शुरू की जाएगी। इसके अलावा संस्थान पंजीकरण काउंटर पर पेटीएम और यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेरेंस) विकल्प भी रखेगा।
आधार बिना 10 गुना पंजीकरण-
एम्स में आधार कार्ड बिना पंजीकरण कराने वालों को दस गुना शुल्क देना होगा। संस्थान ने आधार को अनिवार्य करते हुए इसके बिना पंजीकरण कराने वालों को दस रुपये की जगह 100 रुपये देने होंगे। एम्स के प्रवक्ता डॉ. अमित गुप्ता ने बताया कि आधार कार्ड होने पर ऑनलाइन पंजीकरण के लिए कोई शुल्क नहीं देना पड़ेगा। जिनके पास आधार के अलावा कोई भी पहचान प्रमाण पत्र नहीं हैं।उन्हें पंजीकरण शुल्क 100 रुपये देना होगा।
पेमेंट पोर्टल पर फीस भरेंगे छात्र-
छात्रों को फीस आदि भरने के लिए संस्थान की वेबसाइट पर पेमेंट पोर्टल का विकल्प दिया जाएगा। 100 नए पीओएस या प्वाइंट और सेल बनाएगा, जहां से प्रीपेड कार्ड जारी किया जा सकेगा। जिन मरीजों के पास एंड्रायड फोन नहीं होगा, उनके लिए यूपीआर और यूएसएसडी जैसे सेवाएं दी जाएगीं। इंजीनियिरिंग सेवाओं के भुगतान के लिए कंपनियों को बिना आधार कार्ड के टेंडर जारी नहीं किया जाएगा सभी कर्मचारियों को भी डिजिटल भुगतान का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इसलिए जरूरी है आधार कार्ड-
डॉ. दीपक अग्रवाल के अनुसार एनआईसी से जुड़े सरकारी अस्पताल में इलाज के बाद मरीज एम्स आता है तो उसे पहले कराई गई जांच भी नहीं करानी पड़ेगी। आधार के बारकोड के अंतिम दो नंबर मरीज के स्वास्थ्य संबंधी जानकारी मिल सकेगी।
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