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ओला और उबर के छक्के छुड़ाने आई ''सेवा कैब'', किराया मात्र 5 रु.

इसकी खासियत यह है कि इसमें एप के जरिए बुक के साथ आप सेवा ड्राइवर को रास्ते में हाथ दे कर भी यात्रा कर सकते हैं।

ओला और उबर के छक्के छुड़ाने आई सेवा कैब, किराया मात्र 5 रु.
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बाजार प्रतिस्पर्धा अगर ग्राहकों के हक में है तो राष्ट्रीय राजधानी में टैक्सी सेवा लेने वालों के लिए अच्छी खबर है। मोबाइल एप आधारित टैक्सी सेवा प्रदाता ओला और उबर की कमीशन नीति से परेशान दिल्ली के कुछ टैक्सी चालकों ने लोगों को टैक्सी सुलभ कराने की मोबाइल संचार प्रौद्योगिकी पर आधारित नया उद्यम ‘सेवा कैब' चालू किया है, जिसमें बड़ी संख्या में टैक्सी चालक जुड़ रहे हैं।

सेवा कैब का किराया 5 रुपए किलोमीटर से शुरू होता है। इसकी खासियत यह है कि इसमें एप के जरिए बुक के साथ आप सेवा ड्राइवर को रास्ते में हाथ दे कर भी यात्रा कर सकते हैं। इस स्टार्ट-अप ने अपने नेटवर्क पर ‘सर्ज प्राइसिंग' यानी मौका ताड कर दाम बढ़ाने की नीति लागू नहीं करने का निर्णय किया है।

नौ चालकों की संचालन परिषद

नौ चालकों की संचालन परिषद ‘चालक शक्ति' द्वारा संचालित यह सेवा एक मई से शुरू हो चुकी है और जुलाई के मध्य में इसकी औपचारिक शुरुआत होगी। चालक शक्ति टैक्सी चालकों का संगठन है।

सेवा कैब के सह-संस्थापक और सामाजिक कार्यकर्ता राकेश अग्रवाल ने कहा, ‘‘चालक ओला और उबर की नीतियों से परेशान थे। विदेशों से वित्त पोषित दोनों कंपनियों ने शुरू में चालकों को ‘प्रोत्साहन' के रुप में प्रलोभन दिया लेकिन बाद में उनकी नीतियां बदल गई।

15,000 रु. कंपनियों को देने पड़ते थे

ये दोनों कंपनियां चालकों से हर बुकिंग का लगभग 27 प्रतिशत वसूल लेते हैं। इसमें 20 प्रतिशत कमीशन, 6 प्रतिशत सेवा कर तथा एक प्रतिशत स्रोत पर कर कटौती के रुप में लिया जाता है।'' उन्होंने कहा, ‘‘इससे चालकों को अपनी कमाई का 27 प्रतिशत यानी करीब 15,000 रुपए से अधिक हर महीने उक्त कंपनियां को देना पडता है।''

कमीशन कम करने की मांग की थी

अग्रवाल ने कहा कि अबतक करीब 2,000 चालक इससे जुडे हैं और 10 जुलाई तक इसके 3,000 तक पहुंच जाने का अनुमान है। उल्लेखनीय है कि ओला और उबर से जुडे चालकों ने कमीशन में कमी किए जाने की मांग तथा कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले प्रोत्साहनों में लगातार कमी समेत अन्य मुद्दों को लेकर हाल ही में दिल्ली और कुछ अन्य शहरों में हडताल की थी।

अब मात्र एक फीसदी कमाई का देना होगा

राकेश अग्रवाल के अनुसार चालकों ने इससे परेशान होकर ‘सेवा कैब' शुरु की जिसमें ‘सब्सक्रिप्शन मॉडल' को अपनाया गया है। इसमें उन्हें प्रति महीने कुल 700 रुपए मासिक ही देने हैं जो उनकी कमाई का एक प्रतिशत के आसपास है। चालक शक्ति से जुडे चालक अनुज वर्मा ने कहा, ‘‘हम ओला और उबर की नीतियों से परेशान थे। वे हमारी कमाई में कमीशन समेत अन्य मद में 27 प्रतिशत तक ले लेते थे।

किराया 5 रु. प्रति किलोमीटर से शुरू

हम सरकार समेत सभी पक्षों के पास गए लेकिन हमें राहत नहीं मिली और अंतत: हमने खुद की कैब सेवा शुरु करने का फैसला किया।'' इसके संचालन के बारे में उन्होंने कहा, ‘‘ नौ चालकों की संचालन परिषद इसका संचालन कर रही है।'' इसकी विशेषता के बारे में अग्रवाल ने बताया, ‘‘सेवा कैब में किराया 5 रुपए प्रति किलोमीटर से शुरु होगा और इसमें सर्ज प्राइसिंग नहीं होगा।

हाथ देकर भी रोक सकते हैं कैब

इसमें एक सुविधा ‘स्टरीट हेल' शुरु की गई है। यानी आप राह चलते कैब को हाथ देकर रोक सकते हैं और उसकी सेवा ले सकते हैं।'' अगस्त के मध्य तक इसे जयपुर, चंडीगढ और गुवाहाटी जैसे शहरों में शुरू करने की योजना है। एक सवाल के जवाब में वर्मा ने कहा कि फिलहाल हमने इसमें टैक्सी को रखा है लेकिन जल्द ही इसमें आटो तथा अन्य वाहनों को जोडा जाएगा।

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