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मेट्रो के इतिहास में ''ब्लैक फ्राइडे'', मिनटों का सफर यात्रियों ने किया घंटों में तय

तकनीकि गड़बड़ी से सुबह से शाम तक ब्लू लाइन पर रही संचालन में दिक्कत

मेट्रो के इतिहास में

नई दिल्ली. मेट्रो के इतिहास में तीन जून का दिन 'ब्लैक फ्राइडे' के तौर दर्ज किया जाएगा। हालांकि, ब्लू लाइन पर तकनीकि दिक्कत की वजह से मेट्रो सेवा बाधित होने की यह कोई पहली घटना नहीं है।

इससे पूर्व में भी कई बार इस रूट पर ओवर हेड वायर में खराबी या फिर अन्य तकनीकि दिक्कतों की वजह से सेवा के संचालन में दिक्कतें आती थी, लेकिन शुक्रवार को अब तक की सबसे बड़ी तकनीकि गड़बडी से मेट्रो प्रशासन को जूझना पड़ा।
दिल्ली मेट्रो प्रशासन की मानें तो इससे पूर्व भी ऐसी भी तकनीकि दिक्कतें होती थी, जिसे कुछ वक्त में दुरुस्त कर लिया जाता था, लेकिन शुक्रवार को हुई गड़बड़ी के कारण मेट्रो के इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी व कर्मचारी ट्रैक व प्लेटफार्म गड़बड़ी को दूर करने के लिए जद्दोजहद करते हुए दिखाई दिए।
मैन्यूवली: डीएमआरसी प्रशासन के अनुसार जब कभी भी तकनीकि गड़बड़ी ओवर हेड वायर या फिर अन्य कारणों से उत्पन्न हो जाता है। उस वक्त यात्रियों की सुविधा के लिए मैन्यूवली मेट्रो ट्रेनों का संचालन किया जाता है। इस कारण मेट्रो ट्रेनों का संचालन सुचारु रूप से नहीं होता है।
मिनटों का सफर घंटों में
आमतौर पर नोएडा सेक्टर 18 से राजीव चौक आने के लिए यात्रियों को 30 मिनट का वक्त लगता है। पर शुक्रवार को इसी दूरी को तय करने के लिए यात्रियों को करीब एक से डेढ़ घंटे का वक्त लग गया। चूड़ी बेचने वाले 38 वर्षीय गुलजार का कहना था कि नोएडा सेक्टर-16 से टैगोर गार्डन आने के लिए 50 मिनट का वक्त लगता है। पर शुक्रवार को करीब ढाई घंटे का वक्त लग गया।
ऑटो चालकों की चांदी
जैसे ही ऑटो चालकों को पता चला कि मेट्रो में तकनीकि दिक्कतें आई है। चालकों ने यात्रियों से मनचाहा किराया वसूला शुरू कर दिया। आनंद विहार से उत्तम नगर जाने वाले 20 वर्षीय मंजीत का आरोप था कि ऑटो चालक ने उन से 500 रुपये की मांग की, जबकि मेट्रो के माध्यम से 30 रुपये में पहुंच जाते हैं।
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