Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

DU इलेक्शन में हार का जल्द ही पोस्टमार्टम करेगी BJP

दिल्ली यूनिवर्सिटी में एबीवीपी की शीर्ष दो पदों पर हार हो गई है।

DU इलेक्शन में हार का जल्द ही पोस्टमार्टम करेगी BJP
X

छात्रसंघ चुनाव के नतीजों से मुख्यधारा के चुनाव के लिए भविष्यवाणी करना फिलहाल तो जल्दबाजी होगी लेकिन इससे युवाओं का मूड जरूर भांपा जा सकता है। छात्तीसगढ़ के गुरुघासी दास विश्वविद्यालय का फीस वृद्धि का विरोध हो या फिर जेएनयू में सीट कट की बात हो। बहुतायत छात्र दुखी हैं।

इसका असर समय के साथ दिखने भी लगा है। जिस प्रकार से दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की शीर्ष दो पदों पर हार हो गई है।

इसे भी पढ़ें- क्या युवाओं में कम हो रहा पीएम मोदी का क्रेज? ये हैं सबूत

डीयूएसयू में चार साल बाद एबीवीपी को ऐसी हार मिली है। छात्र राजनीति में इसकी चर्चा जोरों पर है। भाजपा रणनीतिकारों ने भी जोर लगाया था। पूर्वांचली वोटरों को लुभाने के लिए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कैंपस में प्रचार भी किया था। मगर, केवल सचिव की एक सीट पर जीत से संतोष करना पड़ा।

छात्राओं में वैचारिक डर

दिल्ली विश्वविद्यालय में एबीवीपी की कार्यकर्ता रही और वर्तमान में भाजपा नेता बिना नाम के छापने के शर्त पर कहा है कि संगठन की छवि छात्राओं के बीच दादागिरी वाली बन गई है।

रामजस की घटना के बाद से लड़कियां एबीवीपी से कटने लगी है। जिसका असर डीयू के साथ साथ अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालय में देखा जा सकता है और एक साकारात्मक छवि छात्राओं के बीच नहीं जा पाती है। संगठन चुनाव के समय किसी लड़की को टिकट तो देता है लेकिन लड़कियों के बीच विचार पहुंचाने में असमर्थ रहा।

रणनीतिकारों का मानना है कि इसके लिए उनके बीच जाकर काम करना होगा ताकि लड़कियों को भी अपने पक्ष में किया जा सके। उन्होंने संगठन की इस कमी पर कहा कि संगठन इसको दूर करने में सफल नहीं रही है।

एबीवीपी का क्रूर छवि विरोधियों के द्वारा कैंपस में दिखया जा रहा है लेकिन संगठन मुकाबला नहीं कर रही है। दिल्ली विश्वविद्यालय में 60 फीसदी लड़की है और 40 फीसदी लड़के पढ़ाई करते हैं। माना जा रहा है कि अधिसंख्यक छात्राओं की संगठन से दूरी नुकसानदेह साबित हुई हैं।

गिरती शिक्षा पद्धति से भी पड़ा चुनाव पर असर

भाजपा के सूत्रों ने कहा है कि सरकार की नीति अभी तक कॉलेज और विश्वविद्यालयों में साकारात्मक रूप से नहीं पहुंची है। कॉलेजों में प्रध्यापकों की सीटे खाली है, और बहुत सारे प्रध्यापको को परमानेंट नहीं किया गया है जिसके कारण से डीयू के शिक्षकों के साथ-साथ अन्य विश्वविद्यालय के शिक्षक भी नाराज चल रहे हैं इसीलिए शिक्षको ने विद्यार्थियों के बीच संवाद नहीं किया जिसका वोट वैंक पर असर पड़ा ।

संगठन में सुधार की आवश्यकता

पार्टी सूत्रों ने कहा है कि केंद्र में भाजपा की सरकार आने के बाद से एबीपी नेताओं में कुछ हद तक अहम की भावना आ गई है जिसके कारण अति आत्मविश्वास का खामियाजा संगठन को भुगतना पड़ा।

उन्होने एक उदाहरण देते हुए कहा कि प्रत्येक साल चुनाव के समय वैचारिक संगठनों के साथ बैठक करके चुनाव जीतने की रणनीति बनाई जाती थी लेकिन इस साल ये नहीं हुआ इसीलिए संगठन की कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता है।

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story