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कॉरपोरेट घरानों से चंदा लेने में भाजपा अव्वल!

बिरला ग्रुप के सत्या इलेक्टोरल ट्रस्ट ने भाजपा को 107.25 करोड़ रुपए चंदे में दिए हैं।

कॉरपोरेट घरानों से चंदा लेने में भाजपा अव्वल!
नई दिल्ली. देश में राजनीतिक दलों को चुनाव के लिए कारपोरेट घराने चंदा देने में कभी पीछे नहीं रहे हैं। चुनाव आयोग को सौंपे गये आय-व्यय के ब्यौरे से खुलासा हुआ है कि छह राष्ट्रीय दलों को वर्ष 2014-15 में बीस हजार करोड़ की धनराशि चंदे में मिली है, जिसमें चंदा हासिल करने में भारतीय जनता पार्टी अव्वल रही है। केंद्रीय चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार राजनीतिक दलों की वित्तीय पारदर्शिता के लिए निर्धारित समयावधि में चुनावी खर्च के ब्यौरे को सार्वजनिक करते हुए चुनाव आयोग के समक्ष प्रस्तुत करना होता है।
वहीं हर साल चुनाव आयेाग को वार्षिक आय-व्यय का ब्यौरा देना भी जरूरी होता है, जिसमें खासकर चंदे के रूप में मिली राशि का हिसाब-किताब सार्वजनिक करने के लिए केंद्रीय सूचना आयोग ने भी निर्देश दिये थे। बीते वित्तीय वर्ष छह दलों को चंदे के रूप में मिले 20 हजार करोड़ रुपये में से भाजपा को 437.35 करोड़ की राशि, जिसके बाद दूसरे पायदान पर 141.46 करोड़ के चंदे के साथ कांग्रेस पार्टी रही।
जानिए किस उद्योग घराने ने दिए कितना चंदा
राष्ट्रीय राजनितिक दलों द्वारा चुनाव आयोग को चंदे के स्रोतों की दी गई जानकारी के अनुसार प्रमुख उद्योग घरानों में बिरला ग्रुप के सत्या इलेक्टोरल ट्रस्ट ने भाजपा को 107.25 करोड़, कांग्रेस को 18.75 करोड़ राकांपा को मात्र 6 करोड़ रुपए का चंदा दिया गया है। जबकि जनरल इलेक्टोरल ट्रस्ट ने भाजपा को 63.2, कांग्रेस को 54.1 करोड़ रुपए का दान दिया। राकांपा को वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज ने 5 करोड़ रुपए की राशि चंदे के रूप में दी है।
राष्ट्रिय दलों द्वारा चुनाव आयोग को मुहैया कराये गए ब्यौरे के अनुसार वर्ष 2014-15 में इन दलों को कॉर्पोरेट जगत से 576.37 करोड़ रुपए चंदे के रूप में मिले हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने इस दौरान चंदे में मिली राशि के रूप में 38.82 करोड़ रुपये प्राप्त होना स्वीकार किया है। सीपीएम को 3.42 करोड़ रुपये तो सीपीआई को 1.33 करोड़ रुपये चंदे के रूप में प्राप्त हुए हैं। जबकि बहुजन समाज पार्टी पहले ही किसी प्रकार के चंदे की राशि मिलने से चुनाव आयोग में इंकार कर चुकी है।
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