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जनलोकपाल पर अन्ना साथ: आप नेताओं से मिलकर बोले केंद्र ने बाधा डाली तो कदम उठाएंगे

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के जनलोकपाल विधेयक 2015 का सर्मथन करने के लिए अन्ना हजारे का शुक्रिया अदा किया।

जनलोकपाल पर अन्ना साथ: आप नेताओं से मिलकर बोले केंद्र ने बाधा डाली तो कदम उठाएंगे
नई दिल्ली. आप नेता कुमार विश्वास और संजय सिंह ने मंगलवार को सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे से महाराष्ट्र में अमहदनगर जिला स्थित रालेगणसिद्धि गांव में मुलाकात की और अरविन्द केजरीवाल सरकार द्वारा दिल्ली विधानसभा में सोमवार को पेश किए गए जनलोकपाल विधेयक की प्रमुख विशेषताओं से उन्हें अवगत कराया। जिस पर हजारे ने कहा कि यदि केंद्र की राजग सरकार ने आप सरकार द्वारा दिल्ली विधानसभा में पेश किए गए जनलोकपाल विधेयक के रास्ते में बाधा डाली तो वह कदम उठाएंगे। मुलाकात के बाद हजारे ने संवाददाताओं से कहा कि आप नेताओं से चर्चा के दौरान उन्होंने यह आशंका जताई कि केंद्र बाधाएं उत्पन्न कर सकता है क्योंकि विधेयक में दिल्ली में भ्रष्टाचार के मामलों की जांच की बात कही गई है जहां केंद्र सरकार के कार्यालय स्थित हैं।
-केंद्र के पास इच्छाशक्ति का अभाव
सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि केंद्र सरकार के पास भ्रष्टाचार से लड़ने की इच्छाशक्ति का अभाव है और भ्रष्टाचार से निपटने में मुद्दे पर संकुचित रवैया नहीं होना चाहिए। हजारे और उनकी टीम के कुछ शीर्ष कार्यकर्ता 2012 में केजरीवाल नीत समूह से राजनीतिक पार्टी बनाने की उसकी योजना के विरोध में अलग हो गए थे ।
आम आदमी पार्टी ने मंगलवार को दिल्ली के जनलोकपाल विधेयक 2015 का सर्मथन करने के लिए अन्ना हजारे का शुक्रिया अदा किया वहीं मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वह हजारे द्वारा खासतौर पर लोकपाल की नियुक्ति और हटाने के संबंध में प्रस्तावित बदलावों को निश्चित रूप से लागू करेंगे। केजरीवाल के बयान को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सरकार ने सोमवार को विधेयक पेश करने के बाद प्रस्तावित चार सदस्यीय चयन समिति का बचाव किया था जिसमें मुख्यमंत्री, विपक्ष के नेता, दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और विधानसभा अध्यक्ष शामिल हैं।
विधेयक का स्वागत करते हुए अन्ना ने सुझाव दिया था कि लोकपाल चयन समिति में सात सदस्य होने चाहिए जिनमें उच्च न्यायालय के दो न्यायाधीश और एक प्रतिष्ठित शख्स और शामिल हों। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय की मंजूरी के बाद ही पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए। मसौदा विधेयक के अनुसार जनलोकपाल संस्था के प्रमुख या किसी सदस्य को साबित कदाचार या अक्षमता के आधार पर विधानसभा में कुल सदस्यों में से कम से कम दो तिहाई बहुमत के साथ सदन की सिफारिश पर केवल उपराज्यपाल द्वारा हटाया जा सकता है।
- वास्तविक संस्करण के ही समान
जनलोकपाल विधेयक आप के प्रमुख चुनावी वायदों में से एक था। पार्टी ने जोर दिया कि यह इसके 2011 के वास्तविक संस्करण के ही समान है। यह प्रस्तावित लोकपाल को राष्ट्रीय राजधानी में किसी भी लोकसेवक के खिलाफ कार्रवाई करने में सक्षम बनाएगा चाहे वह केंद्र से ही क्यों न हो। हालांकि 2015 का मसौदा विधेयक यह कहता है कि जनलोकपाल या जनलोकपाल कार्यालय के किसी भी कर्मचारी के खिलाफ अभियोग या कानूनी कार्यवाही नहीं चलाई जा सकती, वहीं आप नेताओं ने कहा कि लोकपाल के किसी भी सदस्य को हटाने के लिए महाभियोग की प्रक्रिया चलाई जाएगी। विधेयक उपराज्यपाल की मंजूरी के बाद ही कानून बन पाएगा।
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