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अब मरीजों को एम्स में इलाज कराना पड़ेगा महंगा

शुल्क बढ़ोत्तरी की अंतिम समीक्षा 1996 में हुई थी।

अब मरीजों को एम्स में इलाज कराना पड़ेगा महंगा
नई दिल्ली. अखिल भारतीय आयुर्वेदिक संस्थान (एम्स) में इलाज कराने वाले लोगों के लिए बुरी खबर है। लोगों को अब एम्स अस्पताल में इलाज कराने के लिए पहले से अधिक पैसे खर्च करने पड़ेंगे। हाल ही में वित्त मंत्रालय ने एम्स की फीस को लेकर समीक्षा करने को कहा है। जिसके लिए एम्स की तरफ से सरकार के द्वारा 300 करोड़ रुपए के अतिरिक्त आवंटन की मांग की गई थी।
स्क्रॉल डॉट इन की खबर के अनुसार, एम्स के डिप्टी डॉयरेक्टर वी श्रीनिवास ने बताया कि 20 साल से इलाज और जांच शुल्क में कोई बदलाव नहीं हुआ है। शुल्क बढ़ोत्तरी की अंतिम समीक्षा 1996 में हुई थी। उन्होंने कहा कि इस मामले में वित्त मंत्रालय की तरफ से एक लेटर आया है। जिसकी समीक्षा की जा रही है।
हर विभाग की समीक्षा करने के बाद सभी पहलुओं पर निष्कर्ष निकाला जाएगा उसके बाद फीस बढ़ाने पर फैसला किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एम्स अपने मरीजों को कई तरह की छूट देता है। उस छूट और डिस्काउंट की भी समीक्षा की जाएगी। आपको बता दें कि एम्स में शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव इससे पहले भी रखा गया था। लेकिन राजनीतिक विरोध होने के कारण इस फैसले को फिर से वापस ले लिया गया था।
अस्पताल के स्टाफ ने शुल्क बढ़ाए जाने को लेकर कहा कि सरकार गरीबों के क्वॉलिटी हेल्थ सर्विसेज की बात करती है तो ये चार्ज क्यों बढ़ाया जा रहा है। चार्ज बढ़ाने से गरीबों को काफी परेशानी होगी। आपको बता दें कि वित्त मंत्रालय ने कहा था कि 20 सालों से लोगों की आमदनी में बढ़ोत्तरी हुई जिससे शुल्क बढ़ाने पर लोगों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
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