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छोटी बहन ने बड़े भाई को किडनी देकर दिलाई बीमारी से आजादी, मिलिए इस बहन से और कीजिये इनके जज्बे को सलाम...

कल देश आजादी का पर्व मनाने के साथ ही भाई बहन के प्रेम स्नेह का पर्व रक्षाबंधन भी मना रहा होगा। रक्षाबंधन पर्व के मौके पर हरिभूमि आपको एक ऐसी बहन से मिलवा रहा है। जिसने अपने भाई को बीमारी से आजादी दिलवा दी। जैसे दोनों आंख एक साथ होते हैं वैसे भाई बहन के रिश्ते भी खास होते हैं ।

छोटी बहन ने बड़े भाई को किडनी देकर दिलाई बीमारी से आजादी, मिलिए इस बहन से और कीजिये इनके जज्बे को सलाम...

कोरिया. कल देश आजादी का पर्व मनाने के साथ ही भाई बहन के प्रेम स्नेह का पर्व रक्षाबंधन भी मना रहा होगा। रक्षाबंधन पर्व के मौके पर हरिभूमि आपको एक ऐसी बहन से मिलवा रहा है। जिसने अपने भाई को बीमारी से आजादी दिलवा दी। जैसे दोनों आंख एक साथ होते हैं वैसे भाई बहन के रिश्ते भी खास होते हैं । ये लाइने कोरिया जिले के मनेंद्रगढ़ में रहने वाले कबीर और शमीमा पर पूरी तरह खरी उतरती हैं। कबीर से छोटी बहन शमीमा ने भाई बहन के रिश्ते को इस कदर निभाया कि अपनी एक किडनी देकर उसने अपने भाई के लिए जिंदगी की तमाम मुश्किलों को आसान कर हमेशा के लिए बीमारी से आजादी दिला दी।

मनेंद्रगढ़ के जोड़ा तालाब इलाके में रहने वाले मोहम्मद कबीर ने बीते 1 साल पहले अपनी तबीयत खराब होने पर जब अपना उपचार और जांच करवाई तो यह जानकर उनके पैरों तले जमीन खिसक ने लगी कि उनकी दोनों किडनी फेल हो चुकी हैं और अगर उन्हें जल्दी किडनी ट्रांसप्लांट नहीं किया गया तो वे जिंदगी की जंग हार जाएंगे। इस बात की जानकारी कबीर के परिवारजनों को लगी तो कबीर की छोटी बहन ने अपने भाई को किडनी देने का फैसला किया ।

कहते हैं इंसान जब दिल से कोई चीज चाहता है तो वह जरूर पूरी होती है इस मामले में भी कुछ ऐसा हुआ और भी बहन की किडनी मैच होने के बाद डॉक्टरों ने चेन्नई में किडनी ट्रांसप्लांट कर दिया और उसके बाद कबीर और शमीम आम आदमी की तरह जिंदगी गुजर बसर कर रहे हैं।शमीमा भले ही कबीर से छोटी हो लेकिन उसने जो काम कर दिखाया वह वाकई काबिले तारीफ है। रक्षाबंधन के अवसर पर हरिभूमि ऐसी बहनों के जज्बे को सलाम करता हैं जो रिश्तो को निभाने में कोई गुरेज नही करतें

भाई के साथ ही रहती है बहन

शादी के बाद पति से तलाक होने के बाद शमीमा अपने बड़े भाई कबीर के साथ ही रहती है और बड़ा भाई कबीर भी उसे अपनी बेटी की तरह मानता है और यही वजह है कि शमीमा की दी हुई किडनी के चलते आज कबीर अपनी जिंदगी के आगे का सफर तय कर रहा है। वहीं जहां आए दिन रिश्तो की मर्यादा, उनकी भावनाओं को तार- तार होते देख सकता है । ऐसे में शमीमा और उसके भाई कबीर का यह प्रेम विश्वास और परिवार के प्रति लगाव की कहानी गढ़ने में सफल रहा है जो आने वाले समय में लोगों को प्रेरणा देती रहेगी।

शमीमा बेगम कहतीं हैं कि मेरा मानना है कि सभी बहनों को भाई की किसी भी प्रकार की विपत्ति के समय बहन को साथ देना चाहिए। सभी बहनों को रक्षाबंधन पर यही कहूंगी की भाई का साथ हमेशा दे।

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