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शासन की मदद से पारंपरिक मुर्गीपालन को कारोबार में बदला, परिवार को मिला रोजगार

कोरिया जिले को आदिवासी बहुल इलाका माना जाता है। यहां आदिवासियों की अनेक प्रजाति पारंपरिक तरीकों से अपनी आजीविका चलाते हैं।

शासन की मदद से पारंपरिक मुर्गीपालन को कारोबार में बदला, परिवार को मिला रोजगार
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कोरिया जिले को आदिवासी बहुल इलाका माना जाता है। यहां आदिवासियों की अनेक प्रजाति पारंपरिक तरीकों से अपनी आजीविका चलाते हैं। मुर्गीपालन भी उनका पारंपरिक व्यवसाय है। शासन और जिला खनिज न्यास संस्थान की मदद से उनके पारंपरिक व्यवसाय को व्यवस्थित कारोबार में बदल उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करने में सफलता मिली।

मुख्यालय बैकुंठपुर की एक ग्राम पंचायत भंडारपारा में आदिवासियों के पारंपरिक कार्य को व्यवसायिक रूप देकर उन्हें आर्थिक संबलता की ओर बढ़ाने का काम सफलता की ओर है। यहां ग्राम पंचायत भंडारपारा में कृषि विज्ञान केन्द्र के सहयोग से वनवासियों के समूह के द्वारा उन्नत तरीके से मुर्गी प्रजनन इकाई की स्थापना गत वित्तीय वर्ष में की गई है। यह कार्य महात्मा गांधी नरेगा और जिला खनिज न्यास संस्थान द्वारा किया गया है।
इस कार्य में शेड का निर्माण महात्मा गांधी नरेगा के तहत और इकाई में पक्षियों के व्यवस्था के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र ने अपना सहयोग लगाया है। ग्राम पंचायत भंडारपारा में स्थित इस इकाई को चला रहे बीरेद्र सिंह, राजू सिंह, मनबोध सिंह और दासन सिंह और श्रीमती इंद्रकुंवर ने बताया कि इसमें मुर्गियों की प्रजाति असील के 500 चूजे बीते मई माह में ही रखे गए हैं।

आर्थिक मजबूती की ओर बढ़ रहे

आदिवासियों की पारंपरिक मुर्गीपालन को व्यवसाय का रूप देने का प्रयास सफल हुआ। मनरेगा से आजीविका की संकल्पना प्रोजेक्ट लाइफ को मजबूती प्रदान करते हुए 5 श्रमिक व आदिवासी वर्ग के परिवारों को स्थायी आजीविका के उन्नत साधन से जोड़ा गया है। इस योजना से वे आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं।

मुर्गियों और अंडों दोनों से होती है कमाई

सितंबर महीने के अंत में सभी मुर्गियां अंडे देने लायक हो जाएगी। जिनसे प्रतिदिन 300 अंडे होना संभावित है। प्रति अंडे की बाजार में कीमत 8-10 रूपए होगी। इस लिहाज से यह 2400 रूपए प्रतिदिन की दर से आमदनी होगी। यह प्रकि्रया 30 से 45 दिन तक निरंतर चलेगा।
इसके बाद इनके आधे अंडों को कृषि विज्ञान केन्द्र के हेचिंग सेंटर की मदद से पुन: चूजे के रूप में तैयार किया जाएगा। पुरानी मुर्गियों को 400 रूपए प्रति किलो की दर से पुन: बाजार में बेचकर दो लाख रूपए की आय होगी।

वनवासी श्रमिक परिवारों काे आर्थिक मजबूती देने योजना से जोड़ा गया

कोरिया कलेक्टर नरेन्द्र दुग्गा ने बताया कि मुर्गी प्रजनन इकाई की स्थापना का मूल उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले पंजीकृत वनवासी श्रमिक परिवारों को आर्थिक संबल प्रदान करने सामूहिक मुर्गी पालन से जोड़ने एक सहज सर्वसुविधायुक्त उन्नत शेड समूह के द्वारा तकनीकी देख-रेख में बनाया गया है। प्रजनन केन्द्र पूरी तरह कोरिया कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों के देखरेख में संचालित हो रहा है।

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