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वन विभाग की बड़ी लापरवाही, कानन पेंडारी में वाइट टाइगर ''विजय'' की इलाज के आभाव में मौत

छत्तीसगढ़ के मिनी-जू कानन पेंडारी में वन विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। अधिकारियों की लापरवाही के चलते एक सफेद शेर ''विजय'' की मौत हो गई

वन विभाग की बड़ी लापरवाही, कानन पेंडारी में वाइट टाइगर

छत्तीसगढ़ के मिनी-जू कानन पेंडारी में वन विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। अधिकारियों की लापरवाही के चलते एक सफेद शेर 'विजय' की मौत हो गई। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शेर की मौत सांप काटने से हुई हैे। लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि कानन पेंडारी में वाइल्डलाइफ का एक भी डॉक्टर पदस्थ नहीं है। पूरे जू का दारोमदार एक डॉक्टर के भरोसे है, लेकिन वो भी पशु चिकित्सक है। अब इस हालात में आप भी अंदाजा लगा सकते हैं कि एक पशु चिकित्सक वन्यप्राणीयों की देखरेख किस प्रकार कर पाते होंगे। वैसे कानन पेंडारी में पहली बार ऐसा नहीं हुआ है कि वन्यप्राणियों की लापरवाही के चलते मौत हुई है। पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं, बावजूद इसके वन विभाग अपने पुराने रवैया से बाज नहीं आ रहा है।

बता दें कि तीन साल पहले 22 फीमेल स्पॉटेड डियर की मौत का मामला सामने आया था। तब डीएफओ हेमंत पांडेय ने मौत का कारण खतरनाक बीमारी एंथ्रेक्स बताया था, लेकिन बाद में मौत की कोई और वजह सामने आई। हालांकि वाइट टाइगर के शव का दाह संस्कार कर दिया गया है। ये नियम है। इस घटना की जैसे ही खबर मीडिया में आने लगी तो वन विभाग के होश उड़ गए और मीडिया से दूरी बनाने लगे, ताकि वाइट टाइगर विजय की मौत के संदेह की सुई वन विभाग की ओर ना बढ़ सके।
पूरे मामले में मजेदार बात यह है कि कानन पेंडारी के एसडीओ और मिनी जू के प्रभारी को इतनी फुर्सत नहीं कि वे किसी से फोन पर बात कर सकें। बात ऐसी भी नहीं कि एसडीओ खान को किसी कार्रवाई का डर हो, क्योंकि ये लगभग 25 सालों से अंगद के पांव की तरह यहां जमे हुए हैं। एसडीओ खान की नौकरी बिलासपुर से ही शुरू हुई थी और अब तक यहीं जमे हुए हैं। ऐसे में आप सीधा अंदाजा लगा लीजिए की ये जनाब अपने कार्यों प्रति कितने जिम्मेदार हैं।
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