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जोगी के खिलाफ प्रेस कांफ्रेंस लेने विशेष विमान से रायपुर आए थे जेटली, नेताओं ने साझा की अरुण जेटली की छत्तीसगढ़ से जुड़ी यादें

पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली की छत्तीसगढ़ से कई यादें जुड़ी हैं। इनमें सबसे अहम उस समय का विधायक खरीदी चर्चित कांड था, जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी पर भाजपा विधायकों को खरीदने का आरोप लगा था।

जोगी के खिलाफ प्रेस कांफ्रेंस लेने विशेष विमान से रायपुर आए थे जेटली, नेताओं ने साझा की अरुण जेटली की छत्तीसगढ़ से जुड़ी यादें

रायपुर। पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली की छत्तीसगढ़ से कई यादें जुड़ी हैं। इनमें सबसे अहम उस समय का विधायक खरीदी चर्चित कांड था, जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी पर भाजपा विधायकों को खरीदने का आरोप लगा था। ऐसे समय में लालकृष्ण अडवानी के कहने पर विशेष विमान से रायपुर आकर अरुण जेटली ने विधायकों को खरीदने के लिए दिए गए 45 लाख रुपए सामने रखकर पत्रकारों से चर्चा की थी।

वित्त मंत्री रहते हुए उन्होंने देशभर में जीएसटी लागू कराई और रायपुर आकर यहां के व्यापारियों, उद्योगपतियों और हर उस वर्ग से लंबी चर्चा की, जिनका जीएसटी से सरोकार था। वे यहां पर भाजपा के 15 साल सत्ता में रहने के दौरान अनेकों बार आए। उन्होंने प्रदेश में चुनाव के समय प्रचार भी किया।

प्रदेश में 2003 के चुनाव में जब भाजपा के ज्यादा विधायक जीतकर आ गए थे तो एक बार फिर से यहां पर कांग्रेस की सरकार बनाने के लिए भाजपा के विधायकों को खरीदने का बड़ा प्रयास किया गया। इस मामले में भाजपा के विधायकों को खरीदने का आरोप अजीत जोगी पर लगा था। इस मामले में भाजपा नेता वीरेंद्र पांडेय सहित कुछ और नेताओं से मदद लेने का प्रयास किया गया था। वीरेंद्र पांडेय बताते हैं कि हमने उस मामले का खुलासा करने के लिए ही मिले पैसे लिए थे और उनको सामने रखकर मीडिया के सामने अरुण जेटली ने पत्रकारों से चर्चा की थी।

बकौल श्री पांडेय उस मामले की पूरी रिकार्डिंग का टेप पत्रकारवार्ता से पहले मैंने ही सुनाया था। श्री पांडेय याद करते हुए बताते हैं कि जब वे भाजपा से अलग हो गए थे तो अरुण जेटली जब भी रायपुर आते थे और बृजमोहन अग्रवाल, राजेश मूणत या किसी भी नेता से मिलते थे, तो मेरे बारे में जरूर पूछते थे और कहते थे कि पांडेयजी ने भाजपा क्यों छोड़ी ? उनको पार्टी में रहना चाहिए।

व्यापार प्रकोष्ठ की लेते थे नियमित बैठक

भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के लंबे समय तक अध्यक्ष रहे केदार गुप्ता बताते हैं कि अरुण जेटली ही ऐसे भाजपा नेता रहे हैं, जिनकाे हर तरह की टैक्स के बारे में गहराई से जानकारी थी। वे साल में कम से कम दो बार भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय स्तर की बैठक जरूर लेते थे। पूरे देश के व्यापार प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों को उनसे बहुत कुछ सीखने काे मिलता था। उनके साथ मुरली मनोहर जोशी भी रहते थे। यह उनकी टैक्स के प्रति रुचि ही रही है, जिसके कारण उन्होंने देश में जीएसटी को लागू करवाने में सफलता प्राप्त की। जीएसटी का लागू होना देश में एक नई क्रांति रहा है।

जीएसटी की कार्यशाला में आए

देश में जीएसटी लागू होने के बाद प्रदेश के कई वर्ग के लोगों में बहुत ज्यादा भ्रम की स्थिति थी। ऐसे में अरुण जेटली खुद चलकर रायपुर आए थे और यहां पर आयोजित कार्यशाला में उद्योगपतियों, छोटे-बड़े व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों सहित जीएसटी से जुड़े हर वर्ग के लोगों को बुलाकर लंबे समय तक उनसे बात की। उन्होंने हर किसी के सवाल का जवाब दिया। जिनको भी किसी बात को लेकर भ्रम था, उसे दूर किया। उन्होंने यह भी कहा था कि जहां जरूरत होगी बदलाव किया जाएगा। कई तरह के लगातार बदलाव भी किए गए। उन्होंने अपनी बातों से हर किसी को संतुष्ट किया। कोई भी व्यापारी उनके तर्कों के बाद असंतोष जाहिर नहीं कर सका।

अमर अग्रवाल को सराहा था

रायपुर में जब जीएसटी को लेकर कार्यशाला में शामिल होने अरुण जेटली आए थे, उन्होंने खुले दिल से उस समय प्रदेश के वित्त मंत्री रहे अमर अग्रवाल को सराहते हुए कहा था कि श्री अग्रवाल के अनुभव के साथ इनकी जानकारी का जीएसटी काउंसिल में बड़ा लाभ मिलता है। इनकी वजह से ही कई वस्तुओं के स्लैब को बदला गया है। इन्होंने छत्तीसगढ़ की स्थिति को देखते हुए यहां के लिए जो भी सुझाव दिए, उनको माना गया।

चुनाव प्रचार में आते रहे

अरुण जेटली का अनेकों बार छत्तीसगढ़ आना हुआ। प्रदेश में 15 साल तक भाजपा का शासन रहा। इस बीच जब भी विधानसभा और लोकसभा के चुनाव हुए तो वे यहां पर लगातार प्रचार करने आए। उन्होंने प्रदेश के कई शहरों में सभाएं लीं। उनको सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटते थे। भाजपा के कार्यकर्ता भी हमेशा उनसे प्रभावित रहते थे। वे यहां पर राज्योत्सव में भी आ चुके हैं।

राष्ट्रपति पद के दावेदार कोविंद को लेकर आए थे

देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जब राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ा था तो उनके चुनाव की कमान अरुण जेटली के हाथों में ही थी। वे उन्हें छत्तीसगढ़ विधानसभा भी लेकर आए थे। उन्होंने तब विधानसभा में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह सहित सभी विधायकों से श्री कोविंद की मुलाकात कराई थी और राष्ट्रपति पद के लिए उन्हें वोट देने की अपील भी की थी।

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