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लॉकडाउन में भी ग्रामीणों को मिलेगा रोजगार, मनरेगा पर सरकार ने लिया नया फैसला

मनरेगा कार्यों के लिए 97 करोड़ 90 लाख 20 हजार रूपए जारी किए गए हैं। पढ़िए पूरी खबर-

लॉकडाउन में भी ग्रामीणों को मिलेगा रोजगार, मनरेगा पर सरकार ने लिया नया फैसला
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रायपुर। कोरोना की रोकथाम और नियंत्रण के लिए किये गये लॉकडाउन से निश्चित तौर पर देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। इसके साथ लॉकडाउन से एक ऐसा तबका प्रभावित हो रहा है जो दिहाड़ी की मजदूरी करते हैं। ऐसे में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने कोरोना संक्रमण से बचने और सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा फैसला लिया है, जिसके तहत मनरेगा में काम करने वाले व्यक्तिमूलक और आजीविका बढ़ाने वाले कामों को प्रमुखता से स्वीकृति दी जाएगी।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टीएस सिंहदेव के निर्देश पर विभाग द्वारा मनरेगा कार्यों के लिए 97 करोड़ 90 लाख 20 हजार रूपए जारी किए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2019-20 में मनरेगा के अंतर्गत हुए निर्माण कार्यों के भुगतान के लिए यह राशि जारी की गई है। विभाग द्वारा किए जाने वाले इस तत्काल भुगतान से लॉक-डाउन अवधि में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इस राशि से मनरेगा के तहत गरीब परिवारों की निजी भूमि पर उनकी आजीविका संवर्धन के लिए डबरी, कुएं, मुर्गी शेड, बकरी शेड, सुअर शेड, पशु शेड, अजोला टैंक एवं नाडेप जैसे निर्माण कार्यों के साथ ही ग्रामीण अधोसंरचना से संबंधित कार्यों को पूरा किया जा सकेगा।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव गौरव द्विवेदी ने सभी कलेक्टरों को पत्र लिखकर कार्यस्थल पर कोरोना संक्रमण से बचने सभी सुरक्षात्मक उपायों और सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। पत्र में उन्होंने कहा है कि मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था के आधारभूत संघटकों में से एक महत्वपूर्ण संघटक है। योजना के प्रावधानों के अनुसार पंजीकृत परिवारों के वयस्क सदस्यों द्वारा काम की मांग किए जाने पर अधिकतम 15 दिनों में रोजगार प्रदान किया जाना आवश्यक है।

प्रमुख सचिव ने पत्र में कहा है कि कोविड-19 के कारण लॉक-डाउन के दौर में ग्रामीणों की आजीविका सुरक्षित करना जरूरी है। इसलिए इससे बचाव के सभी सुरक्षात्मक उपायों और दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए मनरेगा कार्य शुरू किए जाएं। राज्य में योजना के तहत पंजीकृत 39 लाख 56 हजार परिवारों में 89 लाख 20 हजार श्रमिक हैं। इनमें से 32 लाख 82 हजार परिवारों के 66 लाख पांच हजार श्रमिकों को मनरेगा के माध्यम से सक्रिय रूप से रोजगार मिलता है।

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