logo
Breaking

उज्ज्वला ने बदली तीज कुंवर की जिन्दगी, अब बारिश में जंगल से नहीं लानी पड़ती लकड़ियां, गैस पर पकता हैं खाना

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से भारत के गरीब परिवारों की महिलाओं को मिट्टी के चूल्‍हे से आजादी मिल रही है। गैस कनेक्शन मिलने से महिलाओं को जंगल से लकड़ी काटने और धुएं से भरी जिंदगी से मुक्ति मिल गई है।

उज्ज्वला ने बदली तीज कुंवर की जिन्दगी,  अब बारिश में जंगल से नहीं लानी पड़ती लकड़ियां, गैस पर पकता हैं खाना

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से भारत के गरीब परिवारों की महिलाओं को मिट्टी के चूल्‍हे से आजादी मिल रही है। गैस कनेक्शन मिलने से महिलाओं को जंगल से लकड़ी काटने और धुएं से भरी जिंदगी से मुक्ति मिल गई है। इस योजना का एक मुख्य उद्देश्य महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना और उनकी सेहत की सुरक्षा करना भी है।

एक साल पहले बारिश के ही मौसम में कोरबा जिले की गृहिणी तीज कुंवर को घर का चूल्हा जलाने के लिए न जाने क्या-क्या मशक्कत करनी पड़ती थी। घर के दूसरे काम छोड़कर जंगल जाना पड़ता था। बारिश का मौसम होता था इसलिए सूखी लकड़ियां नहीं मिलती थी। गीली लकड़ियांे को न चाहकर भी जैसे-तैसे चूल्हे में डालकर सुलगाना पड़ता था।
धुएं से न सिर्फ तीज कुंवर बल्कि घरवाले भी परेशान होते थे। बारिश का मौसम तीजकुंवर के लिए मुसीबतें खड़ी कर देता था। अब जबकि प्रधानमंत्री उज्जवला योजना से उसे मात्र दो सौ रूपए में गैस सिलेण्डर एवं चूल्हा मिल गया है तो बारिश की वो पुरानी आफत बीते दिनों की बात हो गई है। अब तीजकुंवर को बड़ी राहत मिल गई है।

गीली लकड़ियो से खाना बनाने में धुएं से जान निकल जाती थी, गैस ने दिलाई धुएं से मुक्ति

पाली विकासखंड के अंतिम छोर पर स्थित ग्राम पंचायत हरनमुड़ी निवासी तीज कुंवर पति राज कुमार ने बताया प्रधानमंत्री उज्जवला योजना से उसे भी गैस कनेक्शन मिला है। घर में पहले चूल्हा में ही खाना बनता था। बारिश के दिनों में सूखी लकड़ियां तलाशना कठिन काम है, उसपर गीली लकड़ियों से खाना पकाना उससे से भी मुश्किल।
धुंए से जान निकल जाती थी। अब जबकि गैस कनेक्शन मिला है तो उसे खाना पकाने में बहुत सहूलियत होती है। उसने बताया कि गैस के माध्यम से चूल्हा जलाना बहुत आसान है, इससे न तो धुआं निकलता है और न ही बर्तन काले होते हैं। जब मर्जी गैस से चूल्हा जला लो। अब सूखी लकड़ियां खरीदने की भी जरूरत नहीं पड़ती।

खाना बनाने में देर होने से पति से होती थी खटपट, अब समय पर पक जाता है खाना

पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के ग्राम मोरगा में मंझापारा की बसंती लकड़ा गृहणी है। बसंती को घर में खाना पकाने से लेकर बच्चों को सम्हालने और जंगल से लकड़ी भी लाना पड़ता है। कई बार जंगल से लकड़ी लाने में देरी और चूल्हा जलाने में हुई देरी की वजह से पति से खटपट, मनमुटाव भी हो जाता था।
प्रधानमंत्री उज्जवला योजना लागू होने के बाद उसे सिलेण्डर के साथ चूल्हा, लाइटर मिला। अब रसोई गैंस की वजह से खाना पकाना बहुत आसान हो गया है। पहले सोते समय भी तनाव रहता था कि सुबह जंगल जाकर लकड़ी लानी है। चूल्हा फूंकने की वजह से धुएं से भी परेशानी होती थी। अब रसोई गैंस होने से समय पर भोजन पकता है और धुआं भी मुंह और आंख में नहीं जाता।

19.45 लाख महिलाओं को मिली धुएं से मुक्ति

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत छत्तीसगढ़ में 19 लाख 45 हजार 765 गरीब परिवारों को महिलाओं के नाम पर रसोई गैस कनेक्शन दिए जा चुके हैं। इन महिलाओं को रसोई घरों के धुएं से मुक्ति मिल चुकी है। इन्हें मिलाकर राज्य में रसोई गैस कनेक्शन धारक परिवारों की संख्या दोगुनी से ज्यादा हो गई है। योजना शुरू होने के पहले छत्तीसगढ़ में जुलाई 2016 की स्थिति में एलपीजी कनेक्शनधारक परिवारों की संख्या 38 लाख 73 हजार हो गई है।
Share it
Top