Web Analytics Made Easy - StatCounter
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

तीन हजार पन्नों में कैद डीकेएस घोटाले का सच कोर्ट में पेश, डॉ. पुनीत और बैंक अफसरों को मिली जमानत

DKS पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ रिसर्च सेंटर और सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में 50 करोड़ रुपए के चर्चित घोटाले की रिपोर्ट को स्पेशल इन्वेटिगेशन टीम ने तीन हजार पन्नों में कैद किया है।

तीन हजार पन्नों में कैद डीकेएस घोटाले का सच कोर्ट में पेश, डॉ. पुनीत और बैंक अफसरों को मिली जमानत

रायपुर। डीकेएस पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ रिसर्च सेंटर और सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में 50 करोड़ रुपए के चर्चित घोटाले की रिपोर्ट को स्पेशल इन्वेटिगेशन टीम ने तीन हजार पन्नों में कैद किया है। गुरुवार को एसीजेएम पंकज आलोक तिर्की की कोर्ट में घोटाले के आरोपों का पुलिंदा पेश किया गया। पुलिस द्वारा चार्जशीट पेश करने के बाद कोर्ट से डॉ. पुनीत गुप्ता, पीएनबी बैंक एजीएम सुनील अग्रवाल समेत अन्य अफसरों को बड़ी राहत मिली है।

कोर्ट ने तीनों आरोपियों को हाईकोर्ट से मिली अग्रिम जमानत का लाभ देते हुए 2 लाख के निजी मुचलके पर जमानत दे दी। अब 6 नवंबर को केस की सुनवाई होगी। दरअसल एसीजेएम पंकज आलोक तिर्की की अदालत में डीकेएस घोटाले का गोलबाजार पुलिस द्वारा पूरक चालान पेश करने के साथ ही तीनों आरोपियों ने जमानत की अर्जी लगाई थी। इसमें आरोपियों की तरफ से पहले से ही केस में हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत आदेश पारित होने का हवाला दिया गया था। कोर्ट ने अर्जी को स्वीकार करते हुए जमानत मंजूर कर ली।

इसलिए फंसे थे बैंक अफसर

डीकेएस को लोन पास करने में पंजाब नेशनल बैंक के एजीएम सुनील अग्रवाल ने बगैर दस्तावेज परीक्षण किए और फर्जी बैलेंस शीट के आधार पर 64 करोड़ रुपए का लोन स्वीकृत करने मंजूरी दी थी। साथ ही अन्य बैंक अफसरों की भूमिका संदेहास्पद मिली थी, जिसके बाद स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने उनको दिल्ली स्थित निवास से दबोचा था। एसआईटी ने अपनी इन्वेस्टिगेशन में इसका जिक्र किया है।

इनकी शिकायत पर दर्ज हुआ केस

गौरतलब हैए डीकेएस हॉस्पिटल के अधीक्षक केके सहारे की शिकायत पर गोलाबाजार थाने में 50 करोड़ रुपए के उपकरण खरीदी के टेंडर आवंटन, भुगतान समेत अन्य सरकारी पैसे का दुरुपयोग करने में डॉ. पुनीत गुप्ता के खिलाफ गबन, धोखाधड़ी, दस्तावेजों में हेराफेरी और आपराधिक षड़यंत्र रचने की धारा में एफआईआर दर्ज की गई थी। बैलेंस शीट और लोन के दस्तावेजों की खामियों का पुलिस ने चार्जशीट में जिक्र किया है।

इनमें मिली थी खामियां

डीकेएस हॉस्पिटल में उपकरणों की खरीदीए स्टाफ की भर्ती और आउटसोर्सिंग में गड़बड़ी की शासन में शिकायत हुई थी। इसके लिए 3 सदस्यीय जांच कमेटी बनाई गई थी। जांच में हॉस्पिटल में उपकरणों की खरीदी, स्टाफ की भर्ती और आउटसोर्सिंग में करीब 126 करोड़ रुपए शासन का खर्च करना पाया गया, जिसमें डॉण् गुप्ता पर आरोप लगा कि उन्होंने अपने पद और रसूख का फायदा उठाते हुए करीब 50 करोड़ रुपए की गड़बड़ी की है। डीकेएस की समिति के 4 डॉक्टरों को पुलिस ने सरकारी गवाह बनाया है।

इन बिंदुओं पर हुई थी जांच

कमेटी ने जिन 9 बिंदुओं पर जांच की थी, इसमें डीकेएस हॉस्पिटल के संचालन के लिए रेनोवेशन की प्रस्तावित राशि, प्रोजेक्ट के लिए लिया गया लोन, यह रकम किन मदों पर खर्च हुई। किन सेवाओं के टेंडर हुए, किस विधि का उपयोग हुआ और टेंडर किसे मिला, मशीन खरीदी की स्वीकृति और लागत शामिल थी या नहीं।

Next Story
Share it
Top