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जाति प्रमाणपत्र बनाने में परेशानी, कई लोगों ने जाति के स्थान पर लिखा धर्म

छत्तीसगढ़ में जाति प्रमाणपत्र हासिल करने की प्रक्रिया को आसान करने की तमाम कोशिशों के बाद भी प्रदेश में अब भी कई जाति समूहों के लोगों के लिए ये प्रमाणपत्र हासिल करना बड़ी परेशानी का कारण बना है।

जाति प्रमाणपत्र बनाने में परेशानी, कई लोगों ने जाति के स्थान पर लिखा धर्मTrouble in making caste certificate, many people wrote religion in place of caste

रायपुर। छत्तीसगढ़ में जाति प्रमाणपत्र हासिल करने की प्रक्रिया को आसान करने की तमाम कोशिशों के बाद भी प्रदेश में अब भी कई जाति समूहों के लोगों के लिए ये प्रमाणपत्र हासिल करना बड़ी परेशानी का कारण बना है। राज्य सरकार के ध्यान में ये बात आई है कि राज्य में रहने वाले बहुत से धर्मों के लोगों ने अपने शैक्षिक व राजस्व रिकार्ड में जाति की जगह धर्म का नाम दर्ज करा दिया है। यही कारण है कि अब उनका जाति प्रमाणपत्र बनना मुश्किल हो गया है। सरकार ने इस परेशानी को समझकर स्पष्ट किया है कि ग्रामसभा, नगर पंचायत या नगर पालिका के संकल्प को जाति प्रमाणित करने के लिए साक्ष्य माना जाएगा।

पिछड़ा वर्ग के प्रमाणपत्र बनाने में परेशानी

छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार द्वारा हाल ही में पिछड़े वर्गों के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के बाद से यह मामला सामने आया है। वजह ये है कि राज्य में कई धर्मों के लोग जो पिछड़ा वर्ग में आते हैं, लेकिन उनके शैक्षिक या राजस्व दस्तावेज में नाम के साथ जाति के स्थान पर धर्म का नाम लिखा है। धर्म का नाम लिखा होने के कारण उनका पिछड़े वर्ग का व्यक्ति होने का दावा प्रमाणित नहीं हो रहा। नतीजतन उनका पिछड़ा वर्ग का प्रमाणपत्र नहीं बन पा रहा है। इसे इस तरह समझा जा सकता है कि छत्तीसगढ़ में रहने वाले मुसलमानों ने अपने प्रमाणपत्रों में जाति के रूप में मुसलमान का उल्लेख किया है, जबकि इनमें से बहुत बड़ी संख्या में लोग मुस्लिम में पिछड़ा वर्ग में शामिल हैं। इनमें पिंजारा, जुलाहा, कसाई, कस्साब, कुंजड़ा आदि कई तरह की जाति के लोग शामिल हैं, लेकिन इन लोगों ने अपना धर्म मुसलमान लिखा है। इन लोगों को पिछड़ा वर्ग का प्रमाणपत्र बनवाना कठिन हो रहा है। इसी तरह अन्य धर्मों में भी ऐसी ही स्थिति है।

अब ऐसे मिलेगा जाति का सबूत

राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में जारी निर्देश में कहा है कि छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (सामाजिक प्रास्थिति के प्रमाणीकरण का विनियमन) अधिनियम 2013 की कंडिका 2.2 में छत्तीसगढ़ में रहने वाले अनुसूचित जाति, जनजाति व पिछड़ा वर्ग के ऐसे व्यक्ति जिन्हें अपनी जाति प्रमाणित करने के लिए दस्तावेज उपलब्ध कराना अत्यंत कठिन हो, के मामले में ग्रामसभा की उद्घोषणा को मान्य किया जाएगा। यानी ग्रामसभा यह तय करे कि व्यक्ति किस जाति वर्ग का है, तो उसे पुख्ता सुबूत माना जाएगा। इसी प्रकार नगर पंचायतों तथा नगर पालिका परिषद की बैठक में जाति मामले को लेकर इस प्रकार का संकल्प पारित किया जाता है कि व्यक्ति इस जाति का है, तो उसे साक्ष्य के रूप में मान्यता दी जाएगी। साथ ही इस संकल्प के आधार पर समक्ष प्राधिकारी जाति प्रमाणपत्र जारी कर सकते हैं।

सरकार ने जारी किया निर्देश

इस मामले को लेकर राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों, सभी निगमों के आयुक्त, नगर पालिका तथा नगर पंचायतों के सीएमओ को निर्देश जारी किया है। सरकार ने ये स्पष्ट किया है कि जाति प्रमाणपत्र मामले में यदि आवेदक के पास जाति प्रमाणित करने का कोई साक्ष्य न हो, तो ग्रामसभा, नगर पंचायत या पालिका के संकल्प को आधार बनाकर जाति प्रमाणपत्र जारी किया जाए।

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