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उदंती-सीतानदी जंगल उजाड़ने के मामले में रेंज अफसर सहित तीन सस्पेंड, वनमंत्री की संज्ञान में आने के बाद की गई कार्रवाई

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में ओडिशा के ग्रामीणों द्वारा बड़े पैमाने पर जंगल की कटाई कर बस्ती बसाने के मामले में पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ ने शुक्रवार को एक रेंज अफसर सहित तीन वनकर्मियों को निलंबित कर दिया है।

उदंती-सीतानदी जंगल उजाड़ने के मामले में रेंज अफसर सहित तीन सस्पेंड, वनमंत्री की संज्ञान में आने के बाद की गई कार्रवाई

रायपुर। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में ओडिशा के ग्रामीणों द्वारा बड़े पैमाने पर जंगल की कटाई कर बस्ती बसाने के मामले में पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ ने शुक्रवार को एक रेंज अफसर सहित तीन वनकर्मियों को निलंबित कर दिया है। वनकर्मियों को निलंबित करने की असल वजह पेड़ों की कटाई होने की जानकारी मिलने के बाद भी आरोपियों के खिलाफ किसी तरह से कोई कार्रवाई नहीं करना तथा इस बात की जानकारी वन मुख्यालय को नहीं देना बताया जा रहा है।

जंगल कटाई मामले में पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ अतुल शुक्ला ने इंदागांव बफर जोन के रेंज अफसर नीलकंठ गंगवेर, पीपल खूंटा बीट गार्ड सत्यनारायण प्रधान तथा पीपल खूंटा रेंज असिस्टेंट चंद्रशेखर ध्रुव को निलंबित किया है। उल्लेखनीय है कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में ओडिशा के ग्रामीणों द्वारा बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई कर अवैध कब्जा करने की खबर को हरिभूमि ने प्रमुखता के साथ प्रकाशित की। साथ ही इस मामले की वनमंत्री मोहम्मद अकबर द्वारा संज्ञान लेने के बाद विभागीय अफसरों में हड़कंप मच गया और टाइगर रिजर्व में अवैध कटाई मामले में वनबल प्रमुख राकेश चतुर्वेदी ने एक उच्चस्तरीय जांच टीम गठित कर मामले की जांच के आदेश दिए।

जानबूझकर नहीं किया दौरा!

उदंती-सीतानदी कटाई मामले की जांच अगर सही ढंग से की जाए तो इस मामले में छोटे से लेकर बड़े अफसरों तक की संलिप्तता का खुलासा हो सकता है। स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक जांच दल जानबूझकर उन इलाकों में नहीं गयाए जहां पर सर्वाधिक पेड़ों की कटाई हुई है। ऐसा ही एक इलाका तोरेंगा रेंज है, यहां के भाटापानी, चिपारी, ढकाडबरा, डोलसराई, गरीबा, गोना, कोचेंगा, कोकड़ी, मोरघड़ी, शोभा और कई अन्य गांव ऐसे हैं, जहां बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई हुई है। यह इलाका ओडिशा बॉर्डर से लगा हुआ है। तोरेंगा रेंज में बड़े पैमाने पर ग्रीडलिंग के माध्यम से बड़े पैमाने पर पेड़ों को काटा गया है। इंदागांव के ग्रामीणों ने तो यह भी दावा किया है कि पास के गांव स्वर्णापाल में कुछ लोगों ने 40-40 एकड़ पर कब्जा करके खेती चालू कर दी है और अगर उनका कब्जा नहीं हटाया गया तो अगले वर्ष तक के वे खुद भी 40-40 एकड़ पर कब्जा कर लेंगे।

अधिकारियों की लापरवाही उजागर

उदंती.सीतानदी में बड़े पैमाने पर ओडिशा के ग्रामीणों द्वारा कब्जा करने के मामले में अधिकारियों की लापरवाही बरतने की बात सामने आई है। टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रायपुर में रहते हैं और कभी-कभार ही वहां आना.जाना करते हैं। पूर्व में वहां डिप्टी डायरेक्टर के पद पर एसडीओ रैंक के अधिकारी को बैठाकर रखा जाता था। इससे पूरा वन अमला बेकाबू होकर कार्य करने लगा और कोई भी जंगल नहीं जाता था। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के क्षेत्रीय डायरेक्टर का कार्यालय रायपुर में है।

गूगल ने खोला जंगल का राज

इंदागांव के कंपार्टमेंट 1219 की वर्ष 2014 और वर्ष 2018 के गूगल अर्थ से प्राप्त फोटो से पता चलता है कि वर्ष 2014 में वहां घना जंगल हुआ करता था। गूगल अर्थ के ताजा फोटो चौंकाने वाले हैं, जिसमें बड़े पैमाने पर जंगल की कटाई होने की बात सामने आई है। जानकारों का कहना है कि अगर पिछले 10 वर्षों में हुई कटाई की पूरी जांच वैज्ञानिक तरीके से जीपीएस कॉर्डिनेट के माध्यम से की जाए तो वन विभाग को कम से कम 3 से 4 महीने लग जाएंगे। इसके बाद ही जंगल कटाई की वास्तविक स्थिति सामने आ पाएगी।

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