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रायपुर की इस युवती की गुहार – 'मुझे कोरोना है साहब! जांच तो कर दो'

मेकाहारा और एम्स जैसे बड़े अस्पतालों के चक्कर लगाने के बावजूद पीड़िता की जांच नहीं हो सकी, पढ़िए पूरी खबर-

रायपुर की इस युवती की गुहार –

रायपुर। कोरोना को लेकर सरकारों ने पूरे देश में जागरुकता और बचाव के उपाय का नाम लेकर भय तो फैला रखा है, लेकिन बचाव के लिए उपचार तो दूर, जांच तक के लिए लोगों को भटकना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि, मरीज कोरोना से पीड़ित हों या ना हों, लेकिन अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही और अव्यवस्था से पीड़ित जरूर हो रहे हैं। रायपुर की एक युवती चीख-चीखकर कह रही है कि मुझे लग है कि मुझे कोरोना है, मेरी जांच करो, लेकिन राजधानी के दो बड़े अस्पतालों के चक्कर लगाने के बाद उसकी जांच नहीं हुई।

ताजा मामला छत्तीसगढ़ सरकार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल मेकाहारा (अंबेडकर हॉस्पिटल) में सामने आया है। आज सुबह लगभग पौने 10 बजे 27 वर्षीया एक मरीज यहां पहुंची।



मेरी जांच करो, बिल्कुल कोरोना जैसे लक्षण हैं….

बकौल पीड़िता, उन्होंने सबसे पहले अंबेडकर अस्पताल के हेल्प डेस्क पर जाकर संपर्क किया। वहां उन्होंने बताया कि उनके लक्षण कोरोना के बताए गए लक्षण से बिल्कुल मिलते-जुलते हैं। उन्होंने संदेह व्यक्त किया, कि वे इस वायरस से ग्रसित हो सकती हैं। हेल्पडेस्क से उन्हें अंबेडकर अस्पताल के कक्ष क्रमांक 112 का रास्ता दिखा दिया गया।

मेकाहारा में 112 और 205 का चक्कर

पीड़िता कक्ष क्रमांक 112 पहुंचीं, जहां पहले से बड़ी संख्या में मरीज जांच और उपचार के लिए खड़े थे। भीड़ बहुत थी। वहां के कर्मचारियों ने पीड़िता को कह दिया कि 112 में सिर्फ साधारण सर्दी, बुखार की जांच हो रही है। 112 से पीड़िता को कक्ष क्रमांक-205 का रास्ता पकड़ा दिया गया। पीड़िता अब अंबेडकर अस्पताल के कक्ष क्रमांक 205 पहुंचीं। उन्होंने अपने लक्षण बताए और अपनी पर्ची भी दिखाई, लेकिन वहां कोई जांच को तैयार नहीं हुआ।



डॉक्टर का गैरजिम्मेदाराना जवाब

पीड़िता के मुताबिक, वहां मौजूद मेडिकल स्टाफ ने उन्हें साफ कह दिया कि 205 में केवल उन्हीं मरीजों की जांच होगी, जो फॉरेन से आए हैं या देश के कोरोना प्रभावित इलाकों से आए हैं। वहां से पीड़िता को वापस कक्ष क्रमांक 112 भेज दिया गया। पीड़िता का आरोप है कि डॉ. आरके पांडा ने यहां तक कह दिया कि एक-एक आदमी की जांच थोड़ी करते रहेंगे, यहां इतनी भीड़ लगी है।

एम्स में भी नहीं मिली राहत

मेकाहारा में इस बिल्डिंग से उस बिल्डिंग तक भागदौड़ करके थक चुकीं पीड़िता एम्स, रायपुर पहुंची। गेट नंबर 1 के रिसेप्शन से पीड़िता को गेट नंबर 2 भेजा गया। गेट नंबर 2 पर संपर्क करने के बाद उन्हें बाजू की बिल्डिंग में तीसरे फ्लोर पर सी-1 वार्ड में भेजा गया। पीड़िता जब उस वार्ड तक पहुंचीं, तो वहां जांच की कोई व्यवस्था नहीं थी, बल्कि आइसोलेशन वार्ड बनाने की तैयारी की जा रही थी। हाउसकीपिंग के स्टाफ वहां बिस्तरों की साफ-सफाई और झाड़ू-पोंछा में लगे हुए थे। अंतत: पीड़िता, जो चीख चीखकर कह रही है, कि मुझे कोरोना वायरस वाले लक्षण हैं, उसकी जांच दोनों बड़े अस्पताल के चक्कर लगाने के बावजूद नहीं हो पाई।

पूरी भीड़ परेशान

मेकाहारा और एम्स में किसी एक मरीज के साथ ऐसा हो रहा है, ऐसा नहीं है। पूरी भीड़ यहां मौजूद है और ज्यादातर को जांच के लिए इसी तरह भटकना और परेशान होना पड़ रहा है। दरअसल, लोगों में भय इतना ज्यादा पैदा हो चुका है कि साधारण बीमारी को भी लोग कोरोना वायरस से जोड़कर देख रहे हैं। इसलिए, स्वास्थ्य अमले के पास जांच के लिए पर्याप्त बंदोबस्त होना जरूरी है। सरकार ने कोरोना के लिए 'एडवाइजरीज' में जितनी ताकतें लगाई, उसकी आधी ताकत जांच के बंदोबस्त में लगाती, तो शायद एडवाइजरी को 'भय' के नजरिए से नहीं, बल्कि 'जागरूकता और बचाव के उपाय' के नजरिए से देखते।

(कोरोना वायरस से ग्रसित मरीज की पहचान गोपनीय रखने अथवा सार्वजनिक किए जाने संबंधी स्पष्ट गाईड-लाइन ना होने के कारण इस पीड़िता की पहचान फिलहाल गोपनीय रखी जा रही है।)

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