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अफसरों ने वाइटनर लगाकर काला पीला को सफ़ेद किया, वित्तीय कुप्रबंधन पर कैग की तीखी टिप्पणी

भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (सीएजी) ने छत्तीसगढ़ सरकार की वित्तीय कुप्रबंधन पर तीखी टिप्पणी की है। रिपोर्ट में बताया गया कि ज्यादातर विभाग के अधिकारियों ने कैशबुक पर सफेदा लगाकर (व्हाइटनर) करोड़ों रुपए का गोलमाल किया।

अफसरों ने वाइटनर लगाकर काला पीला को सफ़ेद किया, वित्तीय कुप्रबंधन पर कैग की तीखी टिप्पणी
भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (सीएजी) ने छत्तीसगढ़ सरकार की वित्तीय कुप्रबंधन पर तीखी टिप्पणी की है। रिपोर्ट में बताया गया कि ज्यादातर विभाग के अधिकारियों ने कैशबुक पर सफेदा लगाकर (व्हाइटनर) करोड़ों रुपए का गोलमाल किया।
कुछ जगहों में पेंसिल का भी उपयोग किया है। इतना ही नहीं निर्माण सहित कई कार्य में भौतिक सत्यापन नहीं किया गया और न ही रिपोर्ट जमा किया गया। सीएजी ने कहा है कि सरकार का वित्तीय प्रबंधन ठीक नहीं है। अपनी रिपोर्ट में सीएजी 22 जगहों पर अनुशंसा की है।
छत्तीसगढ़ के प्रधान महालेखाकार विजय कुमार मोहंती ने बुधवार को प्रेसवार्ता ली। उन्होंने कहा कि सरकार को अपने वित्तीय प्रबंधन को कंट्रोल करने को कहा है। सरकार के वित्तीय हालात को विधानसभा के पटल पर रखने के बाद श्री मोहंती दोपहर 2 बजे मीडिया को संबोधित किया।
अपने रिपेार्ट में सरकार ने सरकार के वित्तीय प्रबंधन को लेकर कई सवाल उठाए हैं। वर्ष 2016-17 के दौरान सरकार करीब 20,000 करोड़ रुपए इस्तेमाल नहीं कर पाई, जो बजट का करीब 25 प्रतिशत राशि थी।
सरकार ने उस साल 80 हजारकरोड़ का बजट रखा था जबकि खर्च केवल 60000 करोड ही कर पाई। श्री मोहंती ने कहा कि ऐसे में बार-बार अनुपूरक बजट क्यों प्रस्तुत किया गया।
उन्होंने कहा है कि सरकार ने करीब 1465 करोड़ ज्यादा राजस्व सरप्लस दिखाया, जबकि वास्तविक राज्य का वास्तविक राजस्व 3864 करोड़ का है। उन्होंने कहा कि सवाल उठाते हुए कहा कि ये गलत गणना कैसे हो गई।
सीएजी ने कई अनियमितताओं को भी अपनी रिपोर्ट में उजागर किया है। इसमें उन्होंने बताया कि सरकार ने बिजली कंपनी सीएसपीडीसीएल का 2 हज़ार करोड़ का ऋण की न सिर्फ गारंटी ली गई बल्कि उसे पटाने का भी जिम्मा लिया, लेकिन इसे कहां से पटाया जाएगा, इसका कोई उल्लेख नहीं है।
न ही इसके लिए विधानसभा से अनुमति ली गई है। सीएजी ने इसे वित्तीय अपराध माना है। श्री मोहंती ने बताया कि मेक्रो स्तर पर सरकार का वित्तीय प्रबंधन ठीक है, लेकिन माइक्रो स्तर पर इसे दुरुस्त करने की ज़रुरत है।
श्री मोहंती ने सरकार के वित्तीय घाटे को केवल 1.85 पर रखने को लेकर सरकार की सराहना की है। वर्ष 2016-17 में वैट की वसूली सरकार के अनुमान से 2 हज़ार करोड़ रुपए कम थी।
मोहंती ने बताया कि केंद्र सरकार ने इस दौरान 1112 करोड़ रुपये राज्य सरकार को बाईपास करके सीधे एजेंसियों को दे दिया। मोहंती ने बताया कि सरकार ने राज्य की 8 सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में करीब 7700 करोड़ रुपये निवेश कर रखा है लेकिन इसे वापिस लेने या लाभांश लेने को लेकर सरकार ने कोई पॉलिसी नहीं बनाई है।
जबकि इतने ही पैसे सरकार ने रिजर्व बैंक और दूसरी जगहों से लोन लिया जिसका वो सालाना करीब 6 फीसदी ब्याज दे रही है। कैग ने सुझाया है कि अगर इसे लेकर स्पष्ट नीति होती तो सरकार को इसका फायदा मिलता।
कैग ने ये भी बताया कि सरकार के पास करीब 4144 करोड़ रुपये का रिज़र्व फण्ड है। जिसमें करीब 2200 करोड़ रुपयों से ब्याज़ या दूसरी कमाई सरकार नहीं कर रही है। कैग ने इसे किसी जगह निवेश करने की सलाह दी है।
कैग ने कहा कि सरकार करीब 2700 करोड़ की वसूली नही कर पा रही है। जिसमें से करीब 1 हज़ार करोड़ रुपया बिजली का है। कैग ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि महिलाओं के लिए राज्य सरकार काफी स्कीम चला रही है।
लेकिन हकीकत में इन स्कीमों के लिए आवंटित राशि 1455 करोड़ में से केवल 880 करोड़ ही सरकार इस्तेमाल कर पाई।
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