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सरकार ने की ऐसे मदद, महिलाएं सशक्त समूह बनाकर लोगों को दे रही अब रोजगार

महिला सशक्तिकरण के लिए सरकार विभिन्न योजनाएं चला रही है। इन्हीं योजनाओं से मदद लेकर न केवल महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रही हैं

सरकार ने की ऐसे मदद, महिलाएं सशक्त समूह बनाकर लोगों को दे रही अब रोजगार
महिला सशक्तिकरण के लिए सरकार विभिन्न योजनाएं चला रही है। इन्हीं योजनाओं से मदद लेकर न केवल महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रही हैं, बल्कि समाज में नाम भी रौशन कर रही हैं। रायगढ़ की अनुभव स्व सहायता समूह भी इसी तरह सफलता की नई इबारत लिख रही है। समूह से जुड़ी कई महिलाएं रोजगार मिलने से आत्मनिर्भर हो रही हैं।
2009 में रायगढ़ के इंदिरा नगर स्थित अनुभव स्व-सहायता समूह की नींव रखी गई थी। महिला समूह ने अपना सबसे पहला काम आंगनबाड़ी में ‘रेड़ी टू ईट’ बनाने से शुरू किया। स्वच्छता और उच्च गुणवत्ता की वजह से इस समूह का नाम आज पूरे रायगढ़ में प्रसिद्ध है। स्व सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को शुरू में थोड़ी परेशानी हुई थी।
परिवार आैर समाज का सहयोग मिलने से उनकी राह आसान हो गई। दूसरी ओर हर कदम पर महिला स्व-सहायता समूह को ट्रेनिंग से लेकर आर्थिक रूप से प्रशासन से सहयोग मिलता रहा। पूरी तरह सक्षम हो चुकी समूह की महिलाओं ने कैटरिंग को और बढ़ा लिया है। बर्तन और टेंट की साम्रगी भी खरीद ली है। अब वे कहीं भी ऑर्डर मिलने पर खाना बनाने के साथ-साथ टेंट का सामान भी खुद देती हैं।

समूह ने शासन से 13 लाख का ऋण लिया, किश्त भी समय पर लौटाया

अनुभव स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने समय समय पर समूह की जरूरतों को पूरा करने के लिए शासन की योजनाओं की सहायता ली है। अब तक समूह ने तीन अलग अलग आवश्यकताओं के लिए शासन से 13 लाख रुपए तक का ऋण लिया है।
इसके लिए उन्होंने छत्तीसगढ़ महिला कोष की सहायता ली। इसके अलावा राष्ट्रीय आजीविका मिशन से 1 लाख रुपए की अतिरिक्त सहायता भी ली। ऋण की मासिक किश्त भी समूह ने समय से शासन को लौटाया और अब पूरी तरह सक्षम हो चुकी हैं।

5 से 7 हजार रुपए कमा रही महिलाएं

अनुभव स्वसहायता समूह से जुड़ी की महिलाएं आज महीने में 5 से 7 हजार रुपए कमा रही हैं। इससे वे न सिर्फ आत्मनिर्भर हुई हैं बल्कि परिवार को चलाने में भी मदद कर रही हैं। समूह में कुछ सदस्य ऐसी भी हैं जिनके पति ने उनका साथ छोड़ दिया है, पर वे अब समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर हुई हैं और समाज में सम्मान से रह रही हैं।

समूह अब महिलाओं की कर रही आर्थिक मदद

प्रशासन की ओर से हर तरह की मदद मिलने से समूह आज सशक्त हो गया है। एक समय शासन से ऋण लेने वाली समूह आज अपने समूह की सदस्यों की जरूरतों को पूरा करने के लिए ऋण भी देती है। इस ऋण को सदस्य छोटी-छोटी किश्तों में समूह को वापस करती है। क्षेत्र में ये स्वसहायता समूह महिलाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन चुकी है और बहुत सी महिलायें इनसे जुडऩा चाहती हैं। ऐसी कई महिलाएं हैं जिन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग को आवेदन देकर अपने लिए रोजगार की मांग की है।
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