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भोजली उत्सव में दिखी गोंडवाना संस्कृति की झलक

राजधानी के टिकरापारा स्थित गोंडवाना भवन में आज खासी रौनक रही। दूर -दराज से हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग अपने पारंपरिक भोजली त्योहार को उत्साहमय माहौल में मनाने जुटे।

भोजली उत्सव में दिखी गोंडवाना संस्कृति की झलक
राजधानी के टिकरापारा स्थित गोंडवाना भवन में आज खासी रौनक रही। दूर -दराज से हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग अपने पारंपरिक भोजली त्योहार को उत्साहमय माहौल में मनाने जुटे। अलग-अलग वाहनों में गोंडवाना संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन का संदेश देते लोक नर्तकों की टोली राजधानी में बारिश के बाद भी पूरे उत्साह के साथ पारंपरिक लोक वाद्य में झूमते गाते नजर आई।
इस मौके पर मांदर की थाप में लयबद्ध नृत्य की प्रस्तुति देख दर्शक झूम उठे। भोजली महोत्सव मनाने पहुंचे बिल्हा, जशपुर, सरगुजा के प्रतिभागियों ने बताया, गोंडी धर्म , संस्कृति के संरक्षण पर जोर देते हुए समाज के मुखिया की मौजूदगी में ईष्ट देवी-देवताओं की पूजा अर्चना करने लोग जुटते हैं। इसमें प्रकृति की पूजा , देवी -देवताओं को मनाने और अपने रीति-रिवाजों को संजोकर रखने का संकल्प सामूहिक रूप से लिया जाता है।

शोभायात्रा निकाली

प्रदेश भर के दूरस्थ इलाकों से आए आदिवासी समाज के लोगों ने बारिश में भीगते हुए उत्साहपूर्वक गोंडवाना भवन टिकरापारा से शोभायात्रा निकाली, जिसमें लोककलाकारों की टोली पारंपरिक वाद्यों के साथ शामिल हुई। इस दौरान पुजारी पार्क टिकरापारा के सामने मेले सा माहौल देखने को मिला।

मुख्यमंत्री रमन सिंह हुए शामिल

गोंडवाना टिकरापारा में आयोजित भोजली महोत्सव में मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने हर साल भोजली उत्सव के लिए पांच लाख रुपए बजट में प्रावधान करने का ऐलान किया। डॉ. रमनसिंह ने गोंडी संस्कृति को संरक्षित करने पर जोर देते हुए कहा, भोजली उत्सव के इस आयोजन के बहाने समाज के लोग हर साल राजधानी में बड़ी संख्या में जुटते हैं। और मिलजुलकर प्रकृति पूजन से जुड़े भोजली पर्व को उत्साहपूर्वक मनाते हैं। कार्यक्रम में वन मंत्री महेश गागड़ा सहित बड़ी संख्या में दूर -दराज से आए समाज जन शामिल हुए।
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