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एसटी-एससी उत्पीडन मामले में राजधानी बेहद सुखी, नौ माह में नाममात्र के केस

देशभर में एसटी-एससी एक्ट को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है। जबरन फंसाए जाने के आरोप भी थोक में लगे हैं, लेकिन रायपुर जिला इस मामले में सुखी है।

एसटी-एससी उत्पीडन मामले में राजधानी बेहद सुखी, नौ माह में नाममात्र के केस

देशभर में एसटी-एससी एक्ट को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है। जबरन फंसाए जाने के आरोप भी थोक में लगे हैं, लेकिन रायपुर जिला इस मामले में सुखी है। यहां के इकलौते अजाक थाने समेत जिले के 30 थानों में इस एक्ट के तहत नौ माह में केवल 11 मामले दर्ज हुए हैं।

ऐसा नहीं है कि शिकायतें नहीं आई, पर ज्यादातर आपसी सुलह में ही खत्म हो गए। नौ माह में 50 से ज्यादा मामलों में आपसी रजामंदी से शिकायतें वापस ले ली गई।

आकड़े बताते हैं कि यहां अजाक थाने में ज्यादातर मामले आपसी रजामंदी, समझाइश से सुलझ जाते हैं। यहां विवाद के बाद आक्रोशित होकर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जन जाति के पीड़ित पुलिस के पास पहुंचते हैं, लेकिन समझाने पर क्राइम की गंभीरता को भांपकर दोनों पक्ष आपस में समझौते को राजी हो जाते हैं।
पुलिस के मुताबिक जिलेभर के शहरी और ग्रामीण 30 पुलिस थानों और अजाक थानों को मिलाकर जनवरी से सितबंर तक आदिवासियों ने कुल 4 एफआईआर दर्ज कराई है, यानि एसटी एक्ट के तहत 4 केस दर्ज हुए हैं।वहीं एससी एक्ट के तहत कुल 7 एफआईआर दर्ज की गई है। सबसे अहम है, अजाक पुलिस थाना में 9 महीने के बाच सिर्फ 2 एफआईआर दर्ज की गई है।

17 शिकायतों पर जांच जारी

पुलिस के मुताबिक जिलेभर से अनुसूचित और अनुसूचित जनजाति के पीड़ितों की कुल 19 शिकायतें अजाक थाना के पास हैं, जिनकी पुलिस जांच कर रही है। सबसे अहम है, इसमें एक भी राजनीतिक पार्टी या फिर रसूखदार से जुड़ा हुआ नहीं है। अधिकांश शिकायतें मारपीट और महिला अपराध से संबंधित है।

अजाक थाने में केवल दो केस

एएसपी सिटी प्रफुल्ल ठाकुर ने बताया कि जिलेभर के थानों में बीते 9 महीने में एससी-एसटी एक्ट के तहत कुल 11 केस दर्ज हुए हैं। इनमें अजाक पुलिस थाना में सिर्फ 2 केस दर्ज हुए हैं।
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