Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

चंदखुरी : विश्व का इकलौता मंदिर, जहां माता कौशल्या की गोद में खेलते हैं भगवान राम

भगवान रामलला का जन्म स्थान अयोध्या है। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देशभर में उत्सव का माहौल है। अयोध्या के बारे में तो सब जानते हैं। लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं भगवान राम के ननिहाल के बारे में।

चंदखुरी : विश्व का इकलौता मंदिर, जहां माता कौशल्या की गोद में खेलते हैं भगवान राम



अंकुश शर्मा, रायपुर। भगवान रामलला का जन्म स्थान अयोध्या है। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देशभर में उत्सव का माहौल है। अयोध्या के बारे में तो सब जानते हैं। लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं भगवान राम के ननिहाल के बारे में। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से करीब 17 किलो मीटर की दूरी पर एक गांव है चंदखुरी। चंदखुरी माता कौशल्या का गांव है। यहां के कण - कण में भगवान राम व्याप्त हैं। यहां के लोगों के रोम - रोम में भगवान राम विराजमान हैं। यहां के बच्चों को भगवान राम संबंधी दोहें और चौपाईयां याद है। हरिभूमि ने यहां के लोगों से बात की। गांव के लोगों को भगवान राम से बेहद लगाव है। वे भगवान राम को अपना भांजा मानते हैं और भांजे के रूप में ही उनकी पूजा करते हैं। राम मंदिर पर फैसला आने के बाद यहां के लोगों ने उत्सव मनाया, दीए जलाए और प्रभु श्रीराम का गुणगान किया।


बताया जाता है कि महाकौशल के राजा भानुमंत की बेटी कौशल्या का विवाह अयोध्या के राज दशरथ से हुआ था। विवाह में भेंटस्वरूप राजा भानुमंत ने कौशल्या को दस हजार गांव भेंट स्वरूप दिया गये थे जिसमें कौशल्या का जन्म स्थान चंद्रपुरी भी शामिल था। चंदखुरी का प्राचीन नाम चंद्रपुरी था। बताया जाता है कि माता कौशल्या को चंद्रपुर से विशेष लगाव था। ऐसी मान्यता है कि भगवान राम के वनवास से आने के बाद उनका राज्याभिषेक किया गया। उसके बाद भगवान की तीनों माताएं कौशल्या, सुमित्रा और कैकयी तपस्या के लिए चंदखुरी पहुंची। और तीनों माताएं तालाब के बीच विराजित हो गईं। तपस्या के बाद माता सुमित्रा और कैकयी दूसरी जगह चली गयी लेकिन माता कौशल्या आज भी यहां विराजमान है।

मां की गोद में खेलते है प्रभु राम -


यहां मां कौशल्या का एक प्राचिन मंदिर है जिसमें भगवान राम मां की गोद में हैं। इस मंदिर को 8वीं शताब्दी में सोमवंशी राजाओं ने बनवाया था। मंदिर के पुजारी पंडित संतोष कुमार चौबे ने बताया कि तालाब के ठीक बीच स्थित इस मंदिर में माता कौशल्या और उनकी गोद में बाल रूप में भगवान राम की बेहद आकर्षक और मनमोहक मूर्ति है। ऐसा मनोरम दृश्य सिर्फ चंदखुरी में ही देखा जा सकता है। यहां हजारों भक्त माता कौशल्या और प्रभु श्रीराम के दर्शन के लिए आते हैं।




वैद्य राज सुषेण की समाधि


मंदिर के सदस्य राजेंद्र वर्मा ने बताया कि वाल्मिकी रामायण अनुसार जब लक्ष्मण मेघनाद के बाण से घायल हुए थे। तब विभिषण के कहने पर हनुमान जी लंका के प्रसिद्ध वैद्य सुषेण को लेकर आये। और वैद्य सुषेण ने हनुमान जी को द्रोणागिरी पर्वत से संजीवनी लाने को कहा। जिसके बाद वैद्य सुषेण ने संजीवनी बुटी से मूर्छित लक्ष्मण का उपचार किया। लंका के प्रसिद्ध राज वैद्य सुषेण की समाधी भी माता कौशल्या के मंदिर के पास ही मौजूद है। मान्यता है कि सुषेण ने अपने प्राण यही त्यागे थे।

Next Story
Hari bhoomi
Share it
Top